भोपाल: PM आवास योजना के नाम पर अफसरों ने लिए रिश्वत, बना दिए घास-फूस के मकान

ABHINAV AZAD, Last updated: Tue, 21st Dec 2021, 2:49 PM IST
  • मध्य प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य डिंडौरी जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर बड़ा धोखा हुआ है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि अफसरों ने प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर पैसे वसूले. वहीं मकान के नाम पर खप्पर व घास-फूस के मकान बना दिए गए.
(प्रतीकात्मक फोटो)

भोपाल. प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर मध्य प्रदेश में आदिवासियों के साथ बड़ा धोखा सामने आया है. दरअसल, इस योजना के तहत खप्पर व घास-फूस के मकान बनाए जाने बात सामने आई है. मामला आदिवासी बाहुल्य डिंडौरी जिले का है. दरअसल, अब इस पूरे मामले की जांच हुई है. जांच के बाद संबंधित अधिकारियों को तो बचा लिया गया लेकिन गाज ग्राम सचिव और रोजगार सहायक पर गिरी है. दरअसल, जब केलक्टर ने जांच कराई तो मजह एक घर में गड़बड़ी पाई गई. वहीं स्थानीय लोग बताते हैं कि हकीकत तो यह है कि सिर्फ एक-दो मकान ही मानकों के अनुरूप बने हैं.

ग्रामीणों ने ग्राम सचिव से अधिकारियों तक को रिश्वत देने की बात कही है. आलम यह है कि कुछ घरों में तो दरवाजे तक नहीं लगे हैं. प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर डिंडौरी जिले के बैगा आदिवासी बाहुल्य गौरा कन्हारी गांव में कच्चे व झोपड़ीनुमा मकान बना दिए थे. वहीं इन मकानों में छत के नाम पर बल्लियों के सहारे खप्पर या घास-फूस बिछाई गई है. स्थानीय लोग बताते हैं कि पीएम आवास योजना के नाम पर सरपंच, पंचायत सचिव, वन विभाग के कर्मचारी व रोजगार सहायक ने अधिकारियों के नाम पर मोटी रकम बतौर रिश्वत के रूप में ली थी.

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एक ग्रामीण ने बताया कि योजना का लाभ दिलाने के नाम पर सरपंच को 5 हजार, ग्राम सचिव ने 5 हजार, रोजगार सहायक ने 3 हजार, फॉरेस्ट विभाग के कर्मचारी ने 1 हजार एवं पंचायत के एक कर्मचारी को 1 हजार रुपये की रिश्वत वसूली गई. साथ ही आरोप है कि जब इस बात का खुलासा हुआ तो जांच के नाम पर लीपापोती हुई. डिंडौरी के कलेक्टर रत्नाकर झा ने बताया कि मामला सामने आते ही जांच कमेटी बनाई गई थी. जांच में दोषी पाए गए ग्राम रोजगार सहायक तथा ग्राम सचिव को हटाया है. जांच रिपोर्ट शासन को भेजी गई है. उन्होंने आगे कहा कि रिपोर्ट में वन विभाग के कर्मचारियों सहित अन्य किसी संबंधित अधिकारियों के दोषी होने की बात नहीं आई है.

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