Ahoi Ashtami: अहोई माता की कहानी, संतान की सुरक्षा के लिए माताएं रखती हैं व्रत

Priya Gupta, Last updated: Thu, 30th Sep 2021, 11:55 AM IST
  • हिंदू धर्म में इस दिन का बहुत महत्व है, तारों को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत पूर्ण होता है. अहोई अष्टमी का व्रत निर्जला रखा जाता है. ऐसी मान्यता है कि अहोई अष्टमी के दिन अहोई माता की पूजा करने से माता अहोई संतानों को लंबी उम्र का वरदान देती हैं.
अहोई माता की कहानी

अहोई अष्टमी का व्रत हर साल कृष्णपक्ष की अष्टमी को बनाया जाता है. इस बार अहोई अष्टमी का व्रत इस साल 28 अक्टूबर 2021, को है. इस दिन तारों को अर्घ्य दिया जाता है. हिंदू धर्म में इस दिन का बहुत महत्व है, तारों को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत पूर्ण होता है. अहोई अष्टमी का व्रत निर्जला रखा जाता है. ऐसी मान्यता है कि अहोई अष्टमी के दिन अहोई माता की पूजा करने से माता अहोई संतानों को लंबी उम्र का वरदान देती हैं.वैसे तो भारत वर्ष में प्रत्येक दिन त्योहार है, लेकिन विशेष रूप से आश्विन और कार्तिक मास व्रत-उपवास के साथ उल्लास के दिन कहलाते हैं.

वास्तव में अहोई का तात्पर्य है कि अनहोनी को भी बदल डालना है. भारतीय सनातनी इतिहास इस बात का साक्षी रहा है कि नारी शक्ति में इतना सबल सामर्थ्य रहा है कि उन्होंने कई बार अनहोनी को बदला है. जैसे सावित्री सत्यवान के प्राण ले आई. सती सुकला अपने पति को देवताओं से बचा लाई थी. वृंदा के सतीत्व के कारण देवता जलंधर से हार गए थे तो तुलसी ने शंखचूर्ण राक्षस के प्राण बचाए थे. ठीक इसी तरह एक माता अपने सात पुत्रों के प्राण बचा लाई थी, जिसके बाग अहोई मनाने की परंपरा चल पड़ी.

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एक साहूकार की बेटी मिट्टूी काटने खेत पर गई थी. जिस जगह वह मिट्टी काट रही थी, वहीं साही अपने साथ बेटों से साथ रहती थी. मिट्टी काटते हुए गलती से साहूकार की बेटी की खुरपी के चोट से साही का एक बच्चा मर गया. इस पर गु्स्से में साही ने कहा कि मैं तुम्हारी कोख बांधूंगी.साही के वचन सुनकर साहूकार की बेटी अपनी सातों भाभियों से एक-एक कर विनती करती हैं कि वह उसके बदले अपनी कोख बंधवा लें. सबसे छोटी भाभी ने ननद के बदले अपनी कोख बंधवाने के लिए तैयार हो जाती है.

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