Sankashthi Chaturthi पर चंद्र दर्शन का खास महत्व, पूजा और अर्घ्य के बाद खोलें व्रत

Pallawi Kumari, Last updated: Sun, 20th Feb 2022, 12:16 PM IST
  • आज रविवार को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा गया है. इस दिन भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा की जाती है. लेकिन इस दिन चंद्र दर्शन का भी विशेष महत्व होता है. चंद्रोदय के बाद चंद्रमा की पूजा करने और अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोला जाता है.
संकष्टी चतुर्थी पर चंद्र दर्शन (फोटो साभार-लाइव हिन्दुस्तान)

फाल्गुन महीने की शुक्ल पक्ष की चतुर्ती तिथि का दिन भगवान गणेश की पूजा के लिए समर्पित होता है. इस दिन गणेश जी के 32 रूपों में छठवें स्वरूप गौरी-गणेश की पूजा की जाती है. इस दिन की कई पूजा से भगवान प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं. लेकिन आज चंद्र दर्शन का विशेष महत्व होता है. खास कर आज के दिन व्रत रखने वालों के लिए चंद्र दर्शन जरूरी हो जाता है. 

क्योंकि संकष्टी चतुर्थी के दिन चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर पूजा करने के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है. आइये जानते हैं द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पर गणेश भगवान की पूजा और क्या है चंद्रोदय का समय.

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संकष्टी चतुर्थी पर चंद्र दर्शन का महत्व-

हर महीने की पूर्णिमा तिथि के बाद कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन का विशे, महत्व होता है. कहा जाता आजे के दिन चंद्रमा दर्शन के बाद ही व्रत पूजा माना जाता है. चंद्रमा निकलने से पहले गणेश जी की पूजा और आरती की जाती है. सूर्योदय से शुरू होने वाला संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्र दर्शन के बाद ही समाप्त होता है. चंद्रोदय होने के बाद अर्घ्य देकर पूजा की जाती है और फिर व्रत का पारण किया जाता है. व्रत खोलने से पहेल दान-पुण्य जरूर करें.

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पूजा मुहूर्त-

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत का व्रत रविवार, 20 फरवरी 2022 के दिन रखा जाएगा.

चतुर्थी तिथि आरंभ- शनिवार,19 फरवरी रात्रि 9:56 मिनट से

चतुर्थि तिथि समाप्त- रविवार, 20 फरवरी रात्रि 9 :05 मिनट पर

चंद्रोदय का समय- 9 बजकर 50 मिनट पर (हर शहर में चद्रोदय के समय में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है)

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