वैकुण्ठ चतुर्दशी पर आज होगी भगवान विष्णु की पूजा, ये है मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और कथा

Pallawi Kumari, Last updated: Wed, 17th Nov 2021, 7:02 AM IST
  • वैकुण्ठ चतुर्दशी पर आज भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाती है. कहा जाता है कि आज ही के दिन भगवान शिव सृष्टि का संचालन पुन: भगवान विष्णु को सौंपते हैं. मान्यता है कि आज के दिन भगवान विष्णु की पूरे विधि-विधान से पूजा करने पर वैकुण्ठ धाम की प्राप्ति होती है.
बैकुंठ चुतर्दशी पर आज, होगी भगवान विष्णु की पूजा.

हर साल कार्तिक मास की चतर्दशी तिथि पर वैकुण्ठ चतुर्दशी की पूजा की जाती है. आज बुधवार 17 नवंबर को चतुर्दशी तिथि पर भगवान विष्णु और भोलेनाथ की पूजा की जाएगी. मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने वाले को वैकुण्ठ धाम की प्राप्ति होती है. कहा जाता है कि जब भगवान विष्णु चार महीने के योग निद्रा में होते हैं तो इस दौरान सृष्टि का संचालन भगवान शिव करते हैं. चार महीने बाद कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु जागते हैं और फिर वैकुण्ठ चतुर्दशी पर भगवान शिव पुन: उन्हें कार्यभार सौंप देते हैं. आइये जानते हैं वैकुण्ठ चतुर्दशी की पौराणिक कथा, पूजा विधि, महत्व व शुभ मुहूर्त.

वैकुण्ठ चतुर्दशी पूजा विधि- आज वैकुण्ठ चतुर्दशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें. रात्रि में 108 कमल के फूलों से भगवान विष्णु की पूजा अराधना करें. भगवान विष्णु के साथ ही भगवान शिव की भी पूजा करें. भगवान शिव को मखाने से बनी खीर या मखाने का भोग लगाएं. पूजा करते समय ‘विना हो हरिपूजां तु कुर्याद् रुद्रस्य चार्चनम्। वृथा तस्य भवेत्पूजा सत्यमेतद्वचो मम।।’ मंत्र का जाप करें.

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पूजा का शुभ मुहूर्त- चतुर्दशी तिथि 17 नवंबर, बुधवार के दिन प्रातः 09 बजकर 50 मिनट से शुरू हो जाएगी और 18 नवंबर, गुरुवार के दिन दोपहर 12 बजे चतुर्थी तिथि समाप्त होगी.

वैकुण्ठ चतुर्दशी की पौराणिक कथा- कहा जाता है कि एक बार भगवान विष्णु ने काशी में भगवान शिव को एक हजार स्वर्ण कमल के फूल चढ़ाने का संकल्प किया. भगवान शिव ने जब विष्णु जी की परीक्षा लेने के लिए सभी में से एक स्वर्ण फूल कम कर दिया तो फूल कम होने पर विष्णु जी अपने ‘कमल नयन’ आंख को समर्पित करने लगे. तभी भगवान शिव प्रकट हुए और उनकी भक्ति देख प्रसन्न हुए. भगवान शिव ने कहा कि कार्तिक मास की इस शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी ‘वैकुण्ठ चौदस’के नाम से जानी जाएगी.

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