देहरादून: राजनाथ सिंह ने रखी उत्तराखंड सैन्यधाम की नींव, कहा- ये बहुत बड़ा काम

Smart News Team, Last updated: Wed, 15th Dec 2021, 2:39 PM IST
  • रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को उत्तराखंड के देहरादून में सैन्यधाम का शिलान्यास किया. सैनिक सम्मान यात्रा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तराखंड वीरों की धरती है और यहां सैन्य धाम बनाना कोई छोटा काम नहीं 
देहरादून में सैनिक सम्मान कार्यक्रम को संबोधित करते रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (फोटो- रक्षा मंत्री कार्यालय ट्विटर)

देहरादून: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बुधवार को उत्तराखंड पहुंचे. राजधानी देहरादून में उन्होंने सैनिक सम्मान यात्रा कार्यक्रम को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने गुनियाल गांव पुरुकुल में उत्तराखंड सैन्यधाम की नींव रखी. राजनाथ ने कहा कि उत्तराखंड वीरों की धरती है. राज्य में सैन्यधाम बन रहा है, इसे जल्द से जल्द पूरा किया जाएगा. राज्य के कोने-कोने से 1734 शहीदों के घर के आंगन से मिट्टी लाकर ये धाम बनाया जा रहा है. कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री ने शहीदों के परिजन को सम्मानित भी किया.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखंड की वादियों में हमेशा से शौर्य, साहस और पराक्रम के किस्से सुने और सुनाए जाते हैं. यहां चार धाम हैं, गंगोत्री, यमुनोत्री, बदरीनाथ और केदारनाथ. अब उत्तराखंड सरकार ने एक और धाम यानी सैन्यधाम की स्थापना का संकल्प लिया है. यह सैन्यधाम उत्तराखंड की सैन्य परम्परा का प्रतीक बनेगा. यही कारण है कि यहां पर राज्य के कोने-कोने से वीरगति को प्राप्त हुए 1734 सैनिकों के आंगन की मिट्टी लाई गई है. यह कोई छोटा काम नहीं है.

सीडीएस जनरल बिपिन रावत हमेशा लोगों के दिलों में रहेंगे- राजनाथ

राजनाथ सिंह ने कहा, ‘उत्तराखंड का यह क्षेत्र तो वीरों का क्षेत्र है. देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत उत्तराखंड की इसी महान परंपरा के वाहक थे. उनका निधन देश की बहुत बड़ी क्षति है. आज जनरल रावत भले ही इस दुनिया में नहीं है मगर लोगों के दिलों में वे हमेशा जीवित रहेंगे.’

उन्होंने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की बागडोर संभालने के बाद सोमनाथ का पुनरोद्धार किया, केदारनाथ का पुनर्निमाण किया है और अब काशी विश्वनाथ को पुराना गौरवमयी स्वरूप प्रदान किया है. यह उनकी प्रेरणा है, जो अब उत्तराखण्ड में सैन्यधाम के निर्माण का संकल्प लिया गया है.

'वन रैंक, वन पैंशन लागू होने से सैनिकों को फायदा'

राजनाथ ने आगे कहा कि बीजेपी ने पूर्व सैनिकों को उनका ‘वन रैंक वन पेंशन’ का हक दिलाने का वादा किया था. सरकार बनने के बाद ‘वन रैंक, वन पेंशन’ को लागू कर दिया गया. सैनिकों के सम्मान और कल्याण के लिए मोदी सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है. साल 2006 से पहले रिटायर हुए हवलदार जिनको नायाब सूबेदार के रैंक में रिवाइज्ड पेंशन की लाभ नहीं मिल रहा था. मोदी सरकार ने व्यवस्था दी और अब प्री2006 में रिटायर्ड हवलदार जिनको आनरेरी नायक सूबेदार का रैंक मिला, उन्हें भी रिवाइज्ड पेंशन का लाभ मिल रहा है.

'चारधाम मार्ग उत्तराखंड में सुरक्षा और कनेक्टिविटी को नया आयाम देगा'

राजनाथ सिंह ने कहा कि हाल ही में प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान का उद्घाटन किया गया. इससे करीब 100 लाख करोड़ रुपये की बुनियादी ढांचा से जुड़ी परियोजनाओं के विकास को गति मिलेगी. विकास की पहली शर्त होती है सुरक्षा और दूसरी कनेक्टिविटी. 

सुरक्षा की दृष्टि से उत्तराखंड हमेशा एक शांतिप्रिय राज्य रहा है. मगर यहां सबसे बड़ी चुनौती कनेक्टिविटी की रही है. उत्तराखंड समेत पूरे देश में रेल-रोड और एयर कनेक्टिविटी के नजरिए से काफी काम हुआ है. चारधाम मार्ग उत्तराखंड के चारों धामों से देश-विदेश के तीर्थयात्रियों से जोड़ेगा. साथ ही गढ़वाल और कुमांऊ के इलाकों को और नजदीक लेकर आएगा. 

उन्होंने कहा कि ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेलवे लाइन पर काम चल रहा है. कुंमाऊ क्षेत्र में टनकपुर-बागेश्वर रेलवे लाइन पर भी काम हो रहा है. देहरादून के एयरपोर्ट की क्षमता को लगभग पांच गुना बढ़ाया जा रहा है. 

‘सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है उत्तराखंड’

रक्षा मंत्री ने कहा कि हमारा मानना है, भारत के हर सीमावर्ती राज्य का अपना एक सामरिक महत्व है और इन राज्यों के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोग देश के स्ट्रेटेजिक असेट हैं. जब सीमाई राज्यों का विकास होता है तो देश का सुरक्षा चक्र मजबूत होता है.

उत्तराखंड की सीमाएं नेपाल और तिब्बत से लगती हैं. नेपाल के साथ भारत के अच्छे संबंध हैं. तिब्बत के क्षेत्र में ही कैलाश मानसरोवसर स्थित है. कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए हमने लिपुलेख के रास्ते एक नया मार्ग तैयार किया है. इस रास्ते के खुल जाने से समय की बचत होगी.

जहां तक रक्षा क्षेत्र का सवाल है तो मोदी सरकार ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को पूरा करने का प्रयास चल रहा है. आज भारत की रक्षा खरीद का 65-70 फीसदी हिस्सा इस देश में ही बनाया जा रहा है. भारत आने वाले दिनों में न केवल अपनी रक्षा जरूरतों का सामान यहां की धरती पर बनाएगा बल्कि पूरी दुनिया के लिए भी हम रक्षा सामग्री बनाने जा रहे हैं.

 

 

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