उत्तराखंड चारधाम यात्रा: बिना ई-पास वाले श्रद्धालु परेशान, खाने-पीने का इंतजाम नहीं

ABHINAV AZAD, Last updated: Mon, 4th Oct 2021, 6:29 PM IST
  • उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर राज्य सरकार की गाइडलाइन पर चल रही चारधाम यात्रा में केदारनाथ धाम के लिए प्रतिदिन यात्रियों की तादाद 800 तय की गई है.
(फोटो क्रेडिट- सोशल मीडिया)

देहरादून. उत्तराखंड हाईकोर्ट के निर्देश के बाद चारधाम यात्रा को फिर से शुरू किया गया. हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद चारधाम यात्रा से जुड़े कारोबारी समेत तीर्थयात्रियों के चेहरे खिल उठे. लेकिन चारधाम यात्रा पर आए यात्रियों की आपबीती आपको सोचने पर मजबूर कर देगा. दरअसल, सैकड़ों की तादाद में यात्री ऐसे हैं जो धाम पहुंच बाबा के दर्शनों के लिए बीते कई दिनों से पहाड़ों की सड़कों में भूखे प्यासे भटक रहे हैं.

बताते चलें कि उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर राज्य सरकार की गाइडलाइन पर चल रही चारधाम यात्रा में केदारनाथ धाम के लिए प्रतिदिन यात्रियों की तादाद तय की गई है. इस गाइडलाइन के मुताबिक, केदारनाथ धाम के लिए प्रतिदिन 800 तीर्थयात्रियों की संख्या को निर्धारित किया गया है. जिसके लिए देवस्थानम् बोर्ड के ई-पास की व्यवस्था की गयी है. यात्रा खुलने की खबर सुनिते ही देश के कोने कोने से बिना देर किए सीधे उत्तराखंड पहुंचे तीर्थयात्री इस व्यवस्था को समझ ही नहीं पाए. हरिद्वार-ऋषिकेश से बिना ई-पास व गलत जानकारी देकर यात्रियों को हजारों की संख्या में पहाड़ भेज दिया गया, और अब तस्वीर सबके सामने है, वहीं स्थानीय जनप्रतिनिधि इसके लिए प्रशासन व सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं.

त्रिशूल चोटी आरोहण के दौरान नेवी अफसर अनंत कुकरेती शहीद, तीन माह पहले हुई थी शादी

गौरतलब है कि चारों धाम में बात अगर केदारनाथ की जाए तो वहां की जियोग्राफिकल सिचुएशन काफी अलग है. इस वजह से तकरीबन 16 किमी पैदल चलकर बाबा के धाम पहुंचना पड़ता है. इसलिए केदारनाथ पैदल मार्ग में पहाडी से गिरे पत्थरों से हादसे व हाई एटीट्यूट में हार्ट अटैक से मौत की खबर अब आम बात हो गई है. ऐसे में हाईकोर्ट के निर्देश पर जारी ई-पास के बिना ही अगर कोई यात्री धाम पहुंच जाए और उसके साथ कोई अनहोनी हो जाए तो इसका जवाब देना प्रशासन के लिए मुश्किल हो जाएगा.

अन्य खबरें