जनरल बिपिन रावत का हेलिकॉप्टर हादसे में निधन, ऐसा रहा उनका सैन्य करियर

Jayesh Jetawat, Last updated: Wed, 8th Dec 2021, 8:47 PM IST
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत की बुधवार को तमिलनाडु के कुन्नूर में एक सैन्य हेलिकॉप्टर क्रैश में निधन हो गया. इस हादसे में रावत की पत्नी और 11 अन्य लोगों की भी मौत हुई. जनरल बिपिन रावत ने अपने चार दशक लंबे सैन्य करियर में सेना के विभिन्न पदों पर अपनी सेवाएं दीं. 
फोटो- पत्नी के साथ जनरल बिपिन रावत

देहरादून: चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) बिपिन रावत की सैन्य हेलिकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई है. पूरे देश के लिए ये दुखद घड़ी है. रावत अपनी पत्नी और सैन्य अधिकारियों के साथ बुधवार दोपहर में तमिलनाडु में कोयंबटूर के पास सुलूर में आर्मी एयरबेस से कुन्नूर के वेलिंगटन जा रहे थे. तभी कुन्नूर के पास हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया. थल सेनाध्यक्ष के पद से रिटायर होने के बाद उन्हें सीडीएस बनाया गया था. इससे पहले उन्होंने करीब चार दशक तक विभिन्न पदों पर रहकर देश की सेवा की. आइए जनरल बिपिन रावत के करियर पर डालते हैं एक नजर-

जनरल बिपिन रावत भारत के पहले सीडीएस यानी तीनों सेनाओं के प्रमुख रहे. भारत सरकार ने दिसंबर 2019 में उनके रिटायरमेंट से एक दिन पहले ही रावत को सीडीएस के पद पर नियुक्त किया था. वे अपनी अंतिम सांस तक इस पद की जिम्मेदारी निभा रहे थे. रावत उत्तराखंड के सैन्य परिवार से ताल्लुक रखते हैं. उनका जन्म पौड़ी गढ़वाल जिले के एक गांव में 16 मार्च 1958 को हुआ था. उनके पिता भी भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट जनरल रह चुके हैं.

तमिलनाडु में सेना का हेलिकॉप्टर क्रैश, CDS बिपिन रावत पत्नी और स्टाफ संग थे सवार

बिपिन रावत ने 1978 में अपने सैन्य करियर की शुरुआत की. तब उनकी तैनाती 11 गोरखा राइफल में पांचवीं कमीशन में हुई थी. अपने चार दशक के सैन्य करियर में रावत ने ब्रिगेड कमांडर, जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ, साउदर्न कमांड, मिलिट्री ऑपरेशन डायरेक्टरेट में जनरल स्टाफ ऑफिसर ग्रेड-2, जूनियर कमांड विंग में सीनियर इंस्ट्रक्टर, डिप्टी मिलिट्री सेक्रेटरी समेत अन्य पदों पर अपनी सेवा दी.

जनरल बिपिन रावत को 1 सितंबर 2016 को उप सेना प्रमुख बनाया गया. इसके बाद 31 दिसंबर 2016 को उन्हें थल सेना की कमान सौंपी गई. उन्होंने कॉन्गो में संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन का नेतृत्व किया. रावत 1999 में पाकिस्तान के साथ हुए करगिल युद्ध का हिस्सा थे. उन्हें कश्मीर के साथ-साथ पूर्वोत्तर और एलएसी पर स्थित सुदूर इलाकों में काम का अच्छा अनुभव था.

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