भारतीय वैज्ञानिकों का कमाल, हार्टबीट वाले तारे को खोजा, चुंबकीय क्षेत्र नहीं

Smart News Team, Last updated: Thu, 13th Jan 2022, 10:07 AM IST
  • एरीज के वैज्ञानिकों ने हार्टबीट प्रणाली वाले ऐसे असामान्य तारे की खोज की है जो अपने नजदीक कोई स्पंदन नहीं दर्शाता है. यह खोज नैनीताल स्थित आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान के नेतृत्व में हुआ है. यहां वैज्ञानिकों के समूह ने बिना चुंबकीय क्षेत्र वाले दुर्लभ तारे की खोज की है.
भारतीय वैज्ञानिकों का कमाल, हार्टबीट वाले तारे को खोजा, चुंबकीय क्षेत्र नहीं

देहरादून. भारतीय और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों ने एक अनोखा तारा ढूंढ निकाला है. जिसमें हार्टबीट है. एरीज के वैज्ञानिकों ने हार्टबीट प्रणाली वाले ऐसे असामान्य तारे की खोज की है जो अपने नजदीक कोई स्पंदन नहीं दर्शाता है. यह खोज नैनीताल स्थित आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान के नेतृत्व में हुआ है. यहां वैज्ञानिकों के समूह ने बिना चुंबकीय क्षेत्र वाले दुर्लभ तारे की खोज की है. इसका प्रकाश वक्र की समानता से आता है. जो दिल की धड़कन जैसा पैटर्न बनाता है. इसीलिए इसे हार्टबीट का नाम दिया गया है .यह तारा पृथ्वी के सबसे करीब मौजूद कर्क तारामंडल में है.

एरीज समेत दुनिया के 28 देशों के विज्ञानियों ने पहली बार इस तरह की अनूठी खोज की है. उनके साथ 11 अन्य देशों के वैज्ञानिक भी शामिल थे ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका मंथली नोटिसेज ऑफ रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी ने इस शोध को प्रकाशित किया है. विज्ञानियों के मुताबिक दो तारों के आपस में एक दूसरे के करीब आते ही गुरुत्वाकर्षण के कारण वह आपस में कंपन करने लगते हैं. नवीन खोज ने इस धारणा को बदल दिया है. यह खोज हार्ट बीट एचडी 73619 नामक तारे में की गई.

 

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तारों का होता है कमजोर चुंबकीय क्षेत्र

वैज्ञानिकों के डाटा से यह भी साफ हुआ कि नए खोजे गए हार्टबीट स्टार या तो काफी कमजोर होते हैं या फिर उनका कोई मैग्नेटिक फील्ड यानी चुंबकीय क्षेत्र नहीं होता है. कमजोर चुंबकीय क्षेत्र की स्थिति में तारे पर काले धब्बे बनते हैं, जबकि रोशनी वाले स्पॉट मजबूत चुंबकीय क्षेत्र के कारण बनते हैं. वैज्ञानिकों की इस खोज को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस की प्रतिष्ठित साइंस मैगजीन ‘मंथली नोटिसेज ऑफ रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसायटी’ द्वारा प्रकाशन के लिए स्वीकार कर लिया गया है.

अंतरिक्ष में करीब 40 फीसदी तक बाइनरी स्टार

एरीज के पब्लिक आउटरीच कार्यक्रम प्रभारी डॉ. वीरेंद्र यादव के अनुसार दो तारे जो एक दूसरे की परिक्रमा करते है, उन्हें बाइनरी स्टार कहा जाता है. अंतरिक्ष में करीब 40 फीसदी तक बाइनरी स्टार होते हैं. पर इनमें चुंबकीय क्षेत्र का नजर ना आना दुर्लभ बात है. इनसे आ रहे प्रकाश की गणना के बाद पता चला कि यहां एक दुर्लभ हॉर्ट बीट स्टार है.

180 तारों का लगा पता

अभी तक कुल मिलाकर हार्टबीट वाले लगभग 180 तारों की खोज हो चुकी है. तारे जब बाइनरी सिस्टम के बेहद करीब होते हैं तो उनकी चमक और तीव्रता में अचानक से वृद्धि होती है और यह तीव्रता कई पार्ट्स प्रति हजार (पीपीटी) तक होती है.

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