बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने का हुआ ऐलान, 8 मई से बद्रीनारायण का हो सकेगा दर्शन

Mithilesh Kumar Patel, Last updated: Sat, 5th Feb 2022, 4:59 PM IST
  • बसंत पंचमी पर्व के शुभ अवसर पर सादे धार्मिक समारोह में बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि तय गई. टिहरी के नरेंद्रनगर स्थित राजमहल में फैसला किया गया कि धाम के कपाट को 8 मई की सुबह श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा. इसी के साथ उत्तराखंड चारधाम यात्रा 2022 की तैयारियां भी शुरू हो गई है.
टिहरी के नरेंद्रनगर स्थित राजमहल में बदरीनाथ धाम के कपाट को खोले जाने का हुआ ऐलान

देहरादून. उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित बदरीनाथ धाम का कपाट श्रद्धालुओं के लिए 8 मई को खोला जाएगा. बसंत पंचमी पावन पर्व के मौके पर नरेंद्रनगर स्थित राजदरबार में जुटे राजपुरोहितों ने महाराजा मनुज्येंद्र शाह के जन्म कुंडली को देखकर भगवान बदरीनाथ धाम के कपाट खोलने की तिथि ऐलान किया है. इस दौरान राजपुरोहितों ने बताया कि करोड़ों हिंदुओं के आस्था का प्रतीक कहे जाने वाले इस धाम के कपाट को उस दिन प्रात: 6 बजकर 15 मिनट पर वहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा.

नरेंद्रनगर स्थित राजदरबार में शनिवार को राजपुरोहितों का जुटान हुआ. इस दौरान उन्होंने टिहरी नरेश महाराजा मनुज्येंद्र शाह की जन्म कुंडली के आधार पर भगवान बदरीनाथ धाम के कपाट खोले जाने की तिथि का ऐलान किया. वहीं आगामी 22 अप्रैल को भगवान के महाभिषेक के लिए तिलों के तेल को पिरोया जाएगा. बसंत पंचमी पर्व के खास मौके पर नरेंद्रनगर स्थित राजमहल में आचार्य कृष्ण प्रसाद उनियाल ने वैदिक मंत्रोच्चारण और विधि-विधान के साथ गणेश पूजन, पंचांग पूजन और चौकी पूजन के बाद महाराजा मनुज्येंद्र शाह का वर्षफल और ग्रह नक्षत्रों की दशा देखकर भगवान श्री बदरीनाथ के कपाट खोलने की तिथि को घोषित किया है.

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बीते साल 20 नवंबर को शीतकाल के लिए बदरीनाथ धाम के कपाट को बंद कर दिया गया था. इससे पहले 6 नवंबर को केदारनाथ धाम के कपाट बंद किया गया था. वहीं 5 नवंबर को अन्नकूट के मौके पर गंगोत्री धाम के कपाट और 6 नवंबर को भैया दूज के अवसर पर पूरे विधि विधान, पूजा अर्चना व वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यमुनोत्री धाम के कपाट को बंद किया गया था.

बता दें कि आगामी 22 अप्रैल को टिहरी सांसद महारानी माला राज्य लक्ष्मी शाह के नेतृत्व में स्थानीय सुहागिन महिलाएं भगवान बद्री विशाल के महाभिषेक के लिए राजदरबार में तिलों का तेल निकालेंगी. उसके बाद गाडू घड़ा यात्रा (तेलकलश यात्रा) को लेकर डिम्मर पंचायत के लोग अपने गंतव्य के लिए प्रस्थान करेंगे.

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