उत्तराखंड का जिम कॉर्बेट हो सकता है राम गंगा नेशनल पार्क, जानें कैसे पड़ा था अंग्रेजी नाम

Nawab Ali, Last updated: Thu, 7th Oct 2021, 10:36 AM IST
  • दुनियाभर में प्रसिद्ध उत्तराखंड के रामनगर स्थित जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क का नाम बदलने की चर्चा शुरू हो गई. हाल ही में केंद्रीय राज्य मंत्री पर्यावरण और वन अश्विनी कुमार चौबे ने जिम कॉर्बेट का दौरा किया था जिसके बाद पार्क के म्यूजियम की गेस्ट बुक में पार्क का नाम बदलने की बात लिखी थी.
उत्तराखंड के कॉर्बेट नेशनल पार्क का नाम हो सकता है रामगंगा पार्क. (फोटो साभार कॉर्बेट नेशनल पार्क )

देहरादून. दुनियाभर में प्रसिद्ध उत्तराखंड के रामनगर स्थित जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क का नाम बदलने की चर्चा शुरू हो गई. हाल ही में केंद्रीय राज्य मंत्री पर्यावरण और वन अश्विनी कुमार चौबे ने जिम कॉर्बेट का दौरा किया था जिसके बाद पार्क के म्यूजियम की गेस्ट बुक में पार्क का नाम बदलने की बात लिखी थी. केंद्रीय मंत्री ने लिखा है कि जिम कॉर्बेट का नाम बदलकर रामगंगा पार्क किया जाए. केंद्रीय मंत्री के पार्क का नाम बदलने की खूब चर्चा भी हो रही है. 

उत्तराखंड के रामनगर में स्थित जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क का नाम बदलने की चर्चा चल रही है. नाम बदलने की चर्चा को लेकर जिम कॉर्बेट के डायरेक्टर राहुल ने बताया है कि म्यूजियम की गेस्ट बुक में नाम बदलने की बात लिखी गई है. लेकिन राहुल ने नाम बदलने को लेकर कोई भी टिप्पणी नहीं की है. रामनगर स्थित जिम कॉर्बेट पार्क 521 किलोमीटर में फैला हुआ है. नाम बदलने को लेकर पशुप्रेमी प्रकाश किमोठी ने कहा है कि पार्क का नाम बदलने से बेहतर है कि हमें अपनी विरासत के संरक्षण पर फोकस करना चाहिए. इससे पहले इस पार्क का 1936 में हैली नेशनल पार्क किया गया था.

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ऐसे पड़ा जिम कॉर्बेट नाम

जिम कॉर्बेट एक मशहूर शिकारी थे जिन्होंने अपनी तमाम उम्र कई कई तेंदुओं और बाघ का शिकार किया था. उत्तराखंड के प्रसिद्ध रुद्रप्रयाग के आदमखोर बाघ का शिकार भी जिम कॉर्बेट ने ही किया था. जिसने अपने जिंदा रहने तक सौ से ज्यादा लोगों को अपना शिकार बनाया था. जिम कॉर्बेट का जन्म साल 1875 में नैनीताल जिले में हुआ था. उनका परिवार उन्नीसवीं शताब्दी में ब्रिटेन से भारत आया था. शुरू में शिकारी रहे जिम कॉर्बेट धीरे-धीरे संरक्षणवादी बन गये. जीवन के मध्यांतर में उन्होंने तय कर लिया कि अब वो बंदूक तभी उठाएंगे जब किसी जानवर से इंसान को खतरा होगा.

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उन्होंने भारत के पहले राष्ट्रिय पार्क को सृजन में काफी अहम भूमिका निभाई थी. जिसके बाद भारत सरकार ने उनके सम्मान में पार्क का नाम कॉर्बेट नेशनल पार्क रखा. जिम कॉर्बेट ने अपना अंतिम समय अफ्रीका के कीनिया में बिताया और आजीवन शादी नहीं की.

 

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