Durgamati Review: भूमि पेडनेकर की 'दुर्गामती' उम्मीदों पर नहीं उतरी खड़ी

Smart News Team, Last updated: 11/12/2020 09:31 PM IST
  • बॉलीवुड एक्ट्रेस भूमि पेडनेकर की फिल्म दुर्गामती हाल ही में ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई है. ऐसे में बहुत लोग इस फिल्म को देख चुके होंगे तो वहीं कुछ लोग फिल्म के रिव्यू के बारे में जानना चाहते होंगे. तो हम आपसे शेयर करने जा रहे हैं फिल्म का रिव्यू.
भूमि पेडनेकर की दुर्गामती

बॉलीवुड फिल्म दुर्गामती अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हो चुकी हैं . इस फिल्म में एक्ट्रेस भूमि पेडनेकर लिड रोल में हैं . यह एक हॉरर-थ्रिलर फिल्म है. आपको बता दें कि, इस फिल्म में एक्ट्रेस भूमि पेडनेकर के अलावा अरशद वारसी, जिशु सेनगुप्ता, माही गिल और करण कपाड़िया जैसे सितारों ने काम किया हैं. इस फिल्म को तमाम कोशिशों के बाद भी एंटरटेनिंग बनाने में नाकाम साबित हुई. इस फिल्म की कहानी मंदिरों से पुरानी मूर्तियां चोरी हो रही हैं से होती है , जिससे लोगों में बहुत नाराजगी है. उस इलाके का नेता ईश्वर प्रसाद (अरशद वारसी) एक ईमानदार नेता और जल संसाधन मंत्री है . लोगों से ईश्वर प्रसाद वादा करता है कि, अगर वह 15 दिनों के अंदर मूर्तियां वापस नहीं ला पाया तो वह राजनीती से संन्यास ले लेगा .

ईश्वर प्रसाद अब मूर्तियां वापस लाकर लोगो के बीच हीरो न बन जाए इसके लिए उसके खिलाफ साजिश रचते हैं दूसरी पार्टी के नेता . इसके लिए शताक्षी गांगुली (माही गिल) को काम पर लगाया जाता है जो एक सीबीआई अधिकारी हैं . नेता ईश्वर प्रसाद के बारे में पता लगाने के लिए उनकी सेक्रेटरी रह चुकी चंचल चौहान (भूमि पेडनेकर) से पूछताछ की जाती हैं . जो एक आईएएस अफसर हैं और खून के इल्जाम में जेल में सजा काट कर रही है . एक पुरानी और सुनसान हवेली में रहने के लिए अब इस कैदी को छोड़ दिया जाता हैं . फिल्म दुर्गामती की यही से असली कहानी शुरू होती हैं . बेवजह इस फिल्म में कई हॉरर सीन क्रिएट किए गए हैं . हालांकि, फिल्म में ऐसे कई ट्विस्ट हैं, जो काफी मजेदार है . इसके क्लाइमैक्स में क्या होता है यह जानने के लिए आपको पूरी फिल्म देखनी पड़ेगी .

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मालूम हो कि, एक्सपेरिंटल रोल्स के लिए एक्ट्रेस भूमि पेडनेकर जानी जाती हैं . उनकी एक्टिंग इस फिल्म कुछ खास जादू नहीं चला पाई .इस फिल्म में उनकी चारे का हाव भाव और डायलॉग्स आपस में मेल नहीं खाते हैं . लेकिन इस फिल्म में थोड़ा माही गिल को ठीक-ठीक कहा जा सकता है . जीशु सेनगुप्ता की ओवरएक्टिंग बहुत ही खराब है . और एक्टर अरशद वारसी ने भी ठीक काम किया है . बाकी अगर करण कपाड़िया की बात की जाए तो उनकी इस फिल्म में रहने और ना रहने से कुछ फर्क नहीं पड़ता .

इस फिल्म की स्क्रिप्ट काफी कमजोर हैं ऐसे में इसके डायरेक्शन में कुछ कमाल करना संभव ही नहीं है, और फिल्म दुर्गामती का निर्देशन जी अशोक ने किया है . फिल्म को उम्दा बनाने का काम एक बहुत ही बेहतर स्क्रिप्ट ही करती है . वैसे इस फिल्म में बहुत से खामिया है और अगर सितारों की परफॉर्मेंस की बात करे तो वो भी काफी निराश करती हैं . इस फिल्म में बहुत सारे हॉरर सीन भी बेतुके लग रहे है .

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