खुद पर लगे आरोपों की जांच कराएंगे डीडीयू कुलपति, मिली सत्याग्राह की चेतावनी

Ruchi Sharma, Last updated: Fri, 10th Dec 2021, 5:53 PM IST
  • दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में राजभवन से निर्देश आया, जिसमें कुलाधिपति की ओर से निर्देशित किया गया है कि कुलपति प्रो. राजेश स‍िंह अपने खिलाफ आई शिकायत की जांच कराएं और विधि सम्मत तरीके से कार्यवाही सुनिश्चित कर शिकायतकर्ता को अवगत कराएं. इसे लेकर प्रो. कमलेश ने नाराजगी जाहिर की और सत्याग्रह की चेतावनी दी है.
खुद पर लगे आरोपों की जांच कराएंगे डीडीयू कुलपति, मिली सत्याग्राह की चेतावनी

गोरखपुर. दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में कुलपति प्रोफेसर राजेश सिंह के खिलाफ प्रोफेसर कमलेश कुमार गुप्ता ने मोर्चा खोल दिया है. दरअसल प्रोफेसर कमलेश कुमार ने कुलपति पर भ्रष्टाचार और अनियमितता की शिकायत की थी और कुलपति को हटाए जाने की मांग की थी. जिसके बाद राजभवन से एक पत्र आया. पत्र में कुलाधिपति की ओर से निर्देशित किया गया कि कुलपति प्रोफेसर राजेश सिंह खुद अपने खिलाफ शिकायत की जांच कराएं और विधि सम्मत तरीके से कार्यवाही सुनिश्चित कर शिकायतकर्ता को अवगत कराएं यानी कुलपति अपने ही खिलाफ शिकायत की जांच कराएंगे. वहीं इसे लेकर प्रो. कमलेश ने नाराजगी जाहिर की.

 

बता दें कि प्रोफेसर गुप्ता ने पत्र लिखकर कुलपति पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था.इसके साथ कुलपति के कार्यों की आलोचना की थी. उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान कुलपति महाविद्यालय में अध्यापन कार्य कर रहे शिक्षकों को शोध करने में बाधक बन रहे हैं. अब राजभवन से आए पत्र को लेकर प्रोफ़ेसर कमलेश ने नाराजगी जताई और सत्याग्रह करने की बात कही. प्रोफेसर कमलेश ने निर्देश पर सवाल उठाए और कहा कि जिस व्यक्ति के खिलाफ शिकायत है उसी को जांच कैसे सौंपी जा सकती हैं.

प्रो. कमलेश ने पूरे प्रकरण में कुलाधिपति सचिवालय की भूमिका संदिग्ध बताते हुए कहा है कि उन्होंने अपनी शिकायत कुलाधिपति से की है, जबकि पत्र उनके विशेष कार्यादिवस अधिकारी की ओर से आया है, जो उचित नहीं है.

 

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सत्याग्रह करने की कही बात

प्रो. कमलेश गुप्ता ने इंटरनेट मीडिया पर राजभवन से आए पत्र के जरिए जारी निर्देश पर आपत्ति जताते हुए चेतावनी दी है कि एक सप्ताह के भीतर कुलपति प्रो. राजेश स‍िंह को कुलपति के पद से हटाया नहीं गया तो वह प्रशासनिक भवन में स्थापित पं. दीनदयाल की प्रतिमा के समक्ष सत्याग्रह के लिए बाध्य होंगे. क्योंकि प्रो. राजेश स‍िंह का एक भी दिन कुलपति के पद पर रहना विश्वविद्यालय और संबंधित महाविद्यालयों के हित में नहीं है.

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