गोरखपुर: दंडाधिकारी बन गोरक्षपीठाधीश्वर सीएम योगी ने सुलझाई संतों की परेशानियां

Deepakshi Sharma, Last updated: Sun, 17th Oct 2021, 1:40 PM IST
  • विजयादशमी के खास मौके पर गोरक्षपीठाधीश्वर और सीएम योगी आदित्यनाथ ने दंडाधिकारी को भूमिका निभाते हुए संतों के विवादों को हाल करने का काम बेहतरीन तरीके से किया. इस कार्यक्रम में भोज का भी आयोजन किया गया.
दंडाधिकारी बन गोरक्षपीठाधीश्वर सीएम योगी आदित्‍यनाथ ने सुलझाया संतों का मुद्दा

गोरखपुर. विजयादशमी के खास मौके पर गोरक्षपीठाधीश्वर और उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने दंडाधिकारी की भूमिका बेहतरीन तरीके से निभाई है. उन्होंने पात्र-पूजन के अनुष्ठान के क्रम में संतों के विवाद को बेहतरीने तरीके से सुलझाने का काम पूरा किया. इस पूजा के चलते सबसे पहले संतों ने पात्र देवता के तौर पर गोरक्षपीठाधीश्वर की पूजा की है.

उसके बाद संतों की अदालत लगाई गई, जिसमें गोरक्षपीठाधीश्वर योगी नाथपंथ की शीर्ष संस्था अखिल भारतवर्षीय अवधूत भेष बारह पंथ योगी महासभा के अध्यक्ष होने के नाते दंडाधिकारी बने. करीब एक घंटे तक ये अदालत चली है. दशहरा के बाद हर साल ये कार्यक्रम रखा जाता है. समरसता के लिए आयोजित हुआ सहभोज विजय शोभायात्रा में लौटने के बाद ही गोरक्षपीठाधीर की तरफ से गोरखनाथ मंदिर में सामजिक समरसता कायम रखने के लिए सहभोज का भी आयोजन किया गया. इस भोज में गण्यमान्य लोगों के साथ-साथ आमजन ने भी प्रसाद ग्रहण किया.

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दरअसल राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की तरफ से विजयादशमी के मौके पर शस्त्र पूजन और उत्सव का आयोजन किया गया. इसे लेकर महानगर के उत्तरी और दक्षिणी भाग के विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसमें स्वंयसेवकों ने पूरी आस्था के साथ गणवेश में हिस्सा लिया. उत्तरी भाग के गोरक्षनगर में प्रांत प्रचारक सुभाष के नेतृत्व में शस्त्र पूजन किया गया. इस खास मौके पर उन्होंने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि हमारे जीवन में अनेक सामजिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व के प्रसंग है. हर प्रसंग के साथ कोई न कोई उत्सव जुड़ा हुआ है.

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संघ वर्ष भर में कुछ 6 उत्सव मनाता है, विजयादशमी उन्हीं में से एक है. श्री राम भारतीय जनमानस की आत्मा है ऐसा इसीलिए क्योंकि वह अपने सामर्थ्य और सामाजिक संरचना के बल पर मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए और सारी आसुरी शक्तियों उनके सामने शरणागत हो गई.

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