गोरखपुर में बिल्लियों ने उड़ाई मंत्री जी की नींद, रेस्क्यू के लिए लगानी पड़ी टीम

Anurag Gupta1, Last updated: Tue, 9th Nov 2021, 11:52 AM IST
  • गोरखपुर के एमएलसी को बिल्लियों के पकड़ने के लिए बुलानी पड़ी वन विभाग की टीम. बिल्लियों ने एमएलसी के घर पर बच्चे दिए थे. बिल्लियों के शोर और गंदगी से निजात पाने के लिए मंत्री के तमाम जतन फेल हो गए. इसके बाद उन्हें रेस्क्यू करने के लिए प्राणी उद्यान की टीम बुलानी पड़ी.
बिल्लियां पकड़ने के लिए मंत्री जी ने लगाई टीम (फाइल फोटो)

गोरखपुर. गोरखपुर में बिल्लियों से निजात पाने के लिए एमएलसी को वन विभाग की टीम को बुलाना पड़ा. अभी तक यूपी पुलिस की भैंस और घोड़ी ढूढ़ने की खबर सुर्खियों में रहती थी लेकिन इस बार बिल्लियां पकड़ने का खबर आई है. असल में बिल्लियों ने एमएलसी को परेशान कर रखा था. जिसे पकड़ने के लिए शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणी उद्यान के रेंजर समेत पूरी टीम को लगना पड़ा. दो दिन तक परेशान रही टीम ने कामयाबी पा ली है.

असल में ये बिल्लियां एमएलसी के लिए सिरदर्द बन गई थी. एमएलसी उन्हें बाहर निकालने के लिए सारे प्रयास कर चुके थे लेकिन कामयाब नहीं हो पाए. तब जाकर उन्होंने गोरखपुर के प्राणी उद्यान से मांगी. जिसके बाद प्राणी उद्यान के रेंजर समेत पूरी टीम एमएलसी की मदद में जूट गई.

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बिल्ली के बच्चे बने मुसीबत:

एमएलसी के शाहपुर स्थित आवास पर एक बिल्ली ने चार बच्चे दिए. उसके बाद उन बिल्लियों की आवाज और उनके द्वारा की जा रही गंदगी से पूरा घर परेशान था. तमाम कोशिशों के बाद भी उनको भगा नहीं पाए. इसके बाद मंत्री जी ने प्राणी उद्यान के रेंजर सुनील राव से मदद मांगी.

शनिवार से ही रेंजर सुनील राव अपनी टीम के साथ माली गौरव, संदीप, विनय, जगदम्बा और चंद्रदेव बिल्लियों को पकड़ने में जुट गए. दो दिन की मश्क्कत के बाद मेहनत रंग लाई और सोमवार को बिल्ली और उसके बच्चों के पकड़ कर सुरक्षित जगह पर छोड़ दिया गया.

बिल्लियों को पकड़ने के लिए सोमवार को नेट का इस्तेमाल किया गया लेकिन नेट से बाहर निकल कर भाग रही बिल्ली को पकड़ने की कोशिश में एक कर्मचारी विनय बिल्ली के पंजे से चोटिल हो गया. डॉक्टरों ने उसे एंटी रैबिज इंजेक्शन लेने की सलाह दी है.

घरेलू जानवर को रेस्क्यू करने का काम प्राणी उद्यान का नहीं:

प्रभारी डीएफओ विकास यादव ने कहा वन विभाग घरेलू जानवर नहीं रेस्क्यू करता. जंगल के जानवर को रेस्क्यू करता है बिल्ली घरेलू जानवर की श्रेणी में है. वन्यजीव को रेस्क्यू करने का काम वन विभाग का है, न कि प्राणी उद्यान का. दूसरा घरेलू बिल्ली वन्यजीव की श्रेणी में नहीं आती, इसलिए उसके रेस्क्यू का प्रश्न नहीं उठता. फिलहाल प्राणी उद्यान के रेंजर और कर्मचारी मेरे निर्देश पर रेस्क्यू करने नहीं गए थे.

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