गोरखपुर के इस गांव में दिवाली पर बिना सीएम योगी के नहीं जलते घरों में दीये, CM ने ऐसे बदली जिंदगी

Swati Gautam, Last updated: Tue, 2nd Nov 2021, 10:47 PM IST
  • गोरखपुर के कुसम्ही जंगल स्थित वनटांगिया गांव में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नहीं बल्कि 'योगी बाबा' के नाम से पुकारे जाते हैं. यहां के लोग बिना योगी आदित्यनाथ के दिवाली नहीं मनाते और न ही किसी के घर में दिये जलते. सीएम भी हर साल दिवाली पर वनटांगिया बस्ती जरूरत जाते हैं.
गोरखपुर के इस गांव में दिवाली पर बिना योगी के नहीं जलते घरों ने दीये, CM ने बदली इनकी जिंदगी. file photo

गोरखपुर. गोरखपुर के कुसम्ही जंगल स्थित वनटांगिया गांव में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नहीं बल्कि 'योगी बाबा' के नाम से पुकारे जाते हैं. यहां तक की वनटांगिया गांव की परंपरा हो गई है कि दिवाली पर बिना सीएम योगी के आए किसी के घर में दिया नहीं जलेगा. करीब ढाई दशक पहले बतौर सांसद और गोरक्षपीठ उत्तराधिकारी के रूप योगी आदित्यनाथ ने वनटांगियों गांव के लोगों के साथ दिवाली मनाने की जो परंपरा शुरू की वो आज यूपी के सीएम बनने ने बाद तक भी चलती आ रही है. गांव के लोग बेसब्री से इंतजार करते हैं कि दिवाली पर कब उन्हें योगी आदित्यनाथ के दर्शन होंगे. इस साल की दिवाली भी करीब है ऐसे में पूरे गांव में योगी के आगमन को लेकर तैयारियां जोरों शोरों पर हैं.

सिर्फ वनटांगिया गांव वालों का सीएम योगी के लिए प्रेम नहीं है बल्कि योगी की भी दीवाली की शुरूआत ही इस बस्ती से होती है. इसके पीछे की कहानी बेहद रोचक है. दरअसल तिनकोनिया नंबर तीन समेत पांच इलाकों के जंगलों में 1918 में बस्तियां बसी. 1947 में देश तो आजाद हो गया लेकिन ये बस्तियां कभी आजाद न हो पाईं. पेड़ के पत्तों को तोड़कर बेचने और मजदूरी के अलावा जीवनयापन का कोई अन्य साधन भी नहीं था. जंगल बसाने वाले इस समुदाय के पास देश की नागरिकता तक नहीं थी. जंगल में झोपड़ी के अलावा किसी निर्माण की इजाजत नहीं थी. समय-समय पर वन विभाग की तरफ से वनों से बेदखली की कार्रवाई का भय अलग से लगा रहा.

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साल 1998 में योगी आदित्यनाथ पहली बार गोरखपुर के सांसद बने. उसके बाद से मानो वनटांगिया बस्तियों का नया जन्म हुआ. जब योगी के संज्ञान में यह बात आई कि वनटांगिया बस्तियों में नक्सली अपनी गतिविधियों को रफ्तार देने की कोशिश में हैं तो नक्सली गतिविधियों पर लगाम के लिए उन्होंने सबसे पहले शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को इन बस्तियों तक पहुंचाने की ठानी. और यह पूरा भी कर के दिखाया. उन्होंने अपने नेतृत्व वाली महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की संस्थाओं एमपी कृषक इंटर कॉलेज व एमपीपीजी कालेज जंगल धूसड़ को काम में लगाया. जंगल तिनकोनिया नंबर तीन वनटांगिया गांव में 2003 से शुरू ये प्रयास 2007 तक आते आते मूर्त रूप लेने लगे और शिक्षा के आने से धीरे-धीरे ये बस्तियां विकसित हुईं. जब से यहां के लोग सीएम योगी को 'योगी बाबा' के नाम से पुकारने लगे.

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