धर्म-भाषा की बाधा पारकर, लड़के ने 8,458 km दूर से आई मोरक्को की लड़की से रचाई शादी

Uttam Kumar, Last updated: Thu, 20th Jan 2022, 1:03 PM IST
 ग्वालियर निवासी एक युवक ने सभी बाधाओं को पार करते हुए मोरक्को की लड़की से सोशल मीडिया पर हुई मुलाकात को जीवन भर के लिए हमसफ़र बना लिया. प्यार के बीच अक्सर उत्पन्न होने वाली धर्म-भाषा की बाधा को पार करते हुए दोनों के दूसरे से कोर्ट मैरिज कर शादी के बंधन में बंध गए. 
ग्वालियर निवासी अविनाश दौहरे और मोरक्को निवासी फादवा लैमाली ने कोर्ट में शादी के बाद प्रमाणपत्र लेते हुए. 

इंदौर. आपने सात समंदर पार से.. गाना जरूर सुना होगा. अब ग्वालियर के युवक के साथ कुछ ऐसा ही हुआ है. मोरक्को  निवासी युवती से सोशल मीडिया पर शुरू हुई बातचीत जाने कब प्यार में बदला गया पता ही नहीं चला. इतना ही नहीं ग्वालियर निवासी अविनाश दौहरे और मोरक्को निवासी फादवा लैमाली ने प्यार और शादी के बीच आने वाली जात, धर्म, और अलग देश जैसी सभी बाधाओं को पार करते हुए अंततः एक दूजे के हो गए. दोनों ने गुरुवार को  कोर्ट मैरिज कर लिया.

ग्वालियर के प्रीतमपुरम कॉलोनी निवासी अविनाश के अनुसार उनकी दोस्ती मोरक्को निवासी फादवा लैमाली से सोशल मीडिया पर हुई थी. दोनों एक-दूसरे से मैसेज और वीडियो कॉल के जरिए लगातार बात करने लगे. दोनों के बीच धीरे- धीरे बातचीत शुरू हुई और बढ़ती ही चली गई. दोनों ने एक दिन एक दूसरे से शादी करने का निर्णय ले ले लिया. साथ में उन्होंने यह भी फैसला किया कि जाति, धर्म, परिवार सबकुछ ध्यान में रखकर दोनों को एक दूसरे को पाना है. 

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अविनाश बताते हैं कि दोनों जानते थे कि आसान नहीं होने वाला है. दोनों की जाति, धर्म, भाषा यहां तक की देश भी अलग है. परिवार को मनाना उससे भी कही कठिन है. लेकिन एक बार किसी पर दिल आ जाएं तो दिल ये सब कहा देखता है. बस फिर क्या था अविनाश फादवा से शादी की बात लेकर पहुंच गए मोराक्को. उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती थी फादवा के परिवार को इस रिश्ते के लिए मनाना. पहली बार में अविनाश इसमें सफल नहीं हो पाएं. 

अविनाश के अनुसार वो फादवा के पिता को मनाने दुबारा मोराक्को गए. लेकिन दूसरी बार भी फादवा के पिता अली लैमाली शादी के लिए इनकार किया. लेकिन दोनों एक दूसरे से शादी की जिद पर अड़े रहे. और फिर अंतत फादवा के पिता रिश्ते के लिए मान गए. लेकिन उन्होंने अविनाश को भारत छोड़कर मोरक्को में बसने का शर्त लगा दिया. अविनाश ने कहा कि वह हर हाल में फादवा से शादी करना चाहते थे लेकिन उन्होंने फादवा के पिता शर्तों को मानने से मना कर दिया.

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अविनाश ने फादवा के पिता से कहा कि ना तो मैं अपना देश छोडूंगा और न ही अपना धर्म परिवर्तन करूंगा.  ना ही फादवा को धर्म परिवर्तन के लिए कभी कहूंगा. फादवा को भारत में भी अपना धर्म और अपनी परंपराएं उसी तरह निभाने की आजादी होगी, जैसे वह मोरक्को में निभाती आई है. अविनाश की इस एक बात ने फादवा के पिता का दिल जीत लिया. और उसके पिता शादी करवाने को राजी हो गए. 

अविनाश के परिवार को मनाने के लिए भी दोनों को काफी मशक्कत करनी पड़ी. अंतत: वे भी मान गए. दोनों ने सबकुछ का सम्मान करते हुए अपना प्यार पा लिया. अविनाश एक ऑनलाइन कंसल्टिंग कंपनी में काम करने के साथ ही यूपीएससी की तैयारी कर रहे हैं. वहीं फादवा ने ग्वालियर आकर एक निजी यूनिवर्सिटी से मैनेजमेंट की पढ़ाई शुरू की है.  

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