अगर आप भी अनचाहे SMS से हैं परेशान तो रोकने के लिए करना होगा यह काम

Smart News Team, Last updated: Sun, 11th Apr 2021, 7:14 PM IST
यदि आप भी अनचाहे एसएमएस से परेशान है तो बहुत जल्द इनसे छुटकारा पा सकते हैं. अब यह तय कर पाएंगे कि कौन लोग आपको मैसेज भेज सकते हैं या नहीं. ब्रांडेड कंपनियों के संदर्भ में यह प्रक्रिया थोड़ी मुश्किल है. लेकिन इसका समाधान भी जल्द ही निकाला जा रहा है
अब ऐसा कोई भी शख्स आपको मैसेज नहीं भेज पाएगा जिससे आप परेशान होते हैं.

इंदौर. मोबाइल पर आने वाले अनचाहे एसएमएस से सभी परेशान रहते हैं. लेकिन हम आपको बता दें कि आप इनसे जल्द ही छुटकारा पा सकते हैं. आप यह तय कर सकते हैं कि कौन आपको मेसेज भेजेगा और कौन नहीं. आप कंपनी या ब्रांड को को भी यह बता सकते हैं कि आप किस दिन और किस समय प्रमोशनल मेसेज रिसीव करने की स्थिति में होंगे.लेकिन इसमें आपको 400,000 से अधिक कंपनियों को खुद ही यह बताना होगा कि आप उनके एसएमएस रिसीव करने के इच्छुक हैं या नहीं. जो एक काफी बड़ी समस्या नज़र आती है.

जानकारी के अनुसार टेलिकॉम ऑपरेटर फ्रॉड और अनचाहे एसएमएस को रोकने के लिए ब्लॉकचेन आधारित मैकेनिज्म अपना रहे हैं जिसका तीसरा हिस्सा कंसेंट या सहमति है। टेलिकॉम रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने टेलिकॉम ऑपरेटर्स को इसे अपनाने के निर्देश दिए हैं. ऑपरेटर्स ने दुनिया के सबसे बड़े ब्लॉकचेन आधारित सॉल्यूशन डिस्ट्रीब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी (DLT) के पहले दो एलिमेंट्स को लागू कर दिया है. इसका उद्देश्य देश में एक अरब से अधिक मोबाइल फोन यूजर्स के एसएमएस ट्रैफिक पर नजर रखना है। लेकिन इसमें यूजर की सहमति सबसे कठिन और टाइम टेकिंग पार्ट है. क्योंकि करीब 400,000 कंपनियां रोज करीब एक अरब प्रमोशनल एसएमएस भेजती हैं. ऐसे में हमें इन कंपनियों को खुद ही यह बताना होगा कि हम उनके एसएमएस रिसीव करने के इच्छुक हैं या नहीं.

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इस संबंध में भारती एयरटेल, वोडाफोन इंडिया, बीएसएनएल और एमटीएनएल की ब्लॉकचेन सर्विस प्रोवाइडर तानला प्लेटफॉर्म के चेयरमैन उदय रेड्डी ने बताया है कि अगर एक अरब कस्टमर्स 400,000 कंपनियों के लिए कंसेंट देंगे तो इससे भारी डेटाबेस तैयार होगा. डीएलटी की अपलोड कैपेसिटी 100 टीपीएस की है. मतलब इस पर 10 अरब कंसेंट अपलोड करने में तीन साल लगेंगे.लेकिन इतने लंबे समय तक इसे रोका नहीं जा सकता है. उन्होंने कहा कि ऑपरेटर्स का कंसोर्टियम इस समस्या को कम से कम समय में दूर करने के लिए काम कर रहा है. इसमें तानला के अलावा आईबीएम और टेक महिंद्रा भी शामिल है.

हम आपको बता दें कि ट्राई ने तीसरे चरण के क्रियान्वयन के लिए ऑपरेटर्स के सामने कोई टाइम लिमिट नहीं रखी है. इस प्रोजेक्ट में आईबीएम और टेक महिंद्रा रिलायंस जियो के पार्टनर हैं. स्विगी, ऐमजॉन, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और नाइकी जैसी कंपनियां अपने ऐप्स या इन स्टोर परचेजेज और बिलिंग के जरिए आसानी से कस्टमर्स की सहमति ले सकते हैं. लेकिन देश में करीब 6.3 करोड़ छोटी इकाइयां हैं जो अपनी मार्केटिंग जरूरतों के लिए एसएमएस रूट का इस्तेमाल करती हैं या करना चाहती हैं.

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इस संबंध में जानकारी रखने वालों ने बताया कि नए सिस्टम का उद्देश्य एसएमएस के जरिए होने वाले फाइनेंशियल फ्रॉड्स को रोकना है. लेकिन सिम बेस्ड रूट से यह अभी तक जारी है. बैंकरों को आशंका है कि कस्टमर्स का डेटाबेस बनाने और इसे टेलिकॉम कंपनियों और सर्विस प्रोवाइडर्स जैसी थर्ड पार्टीज के साथ साझा करने से निजता के मौलिक अधिकार के उल्लंघन का खतरा है। पहले दो चरण के सख्त नियम कमर्शियल एसएमएस चैनल की ग्रोथ के लिए रिस्की हो सकता है.

टेलीमार्केटिंग फर्म कालेयरा के चीफ रेवेन्यू ऑफिसर अनिकेत जैन ने बताया कि कई ब्रांड्स ईमेल और वॉट्सऐप जैसे प्रचार के दूसरे तरीकों के बारे में सोच रहे हैं. ऐसा नहीं है कि वे एसएमएस के नियमों का पालन नहीं करना चाहते हैं लेकिन उन्हें पता है कि कंसेंट का रास्ता बहुत लंबा और चुनौतियों से भरा है इसलिए वे इससे बचना चाहते हैं.

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