इंदौर में डेथ ऑडिट टीम ने किए खुलासे, मरीजों की स्थिति गंभीर

Smart News Team, Last updated: 22/09/2020 07:50 PM IST
  • इंदौर. अन्य बीमारियों की वजह से मरीज निजी अस्पतालों में बेड न मिलने की वजह से मर रहे हैं. समिति के जरिये एक खुलासा यह भी हुआ कि कोरोना के अलावा भी अन्य बीमारियों में इलाज न होने से लोगों की मौत हुई.
प्रतीकात्मक तस्वीर 

इंदौर| कोरोनाकाल में प्रशासन ने इंदौर में डेथ-ऑडिट के लिए आठ सदस्यीय समिति बनाई है. जाँच के दौरान समिति ने कई चौंकने वाले खुलासे किए हैं. समिति ने माना है कि मरने वाले कुछ ऐसे लोग हैं जो रात भर इलाज के अभाव में भटकते रहे व मरीज सफाई व सुविधा व्यवस्था हेतु निजी अस्पतालों की तरफ रुख कर रहे हैं.

इसके अलावा कोरोना के अतिरिक्त अन्य बीमारियों की वजह से मरीज निजी अस्पतालों में बेड न मिलने की वजह से मर रहे हैं. ऐसे तमाम उदाहरण हैं जिसमें एक 80 साल की महिला इंदौर में 28 अगस्त की रात सांस में तकलीफ होने पर मेदांता अस्पताल से अरविंदो अस्पताल फिर इंडेक्स तक बेड न मिलने की वजह से मौत के मुँह में चली गयी. महिला के अलावा ऐसे तमाम उदाहरण सामने रखते हुए समिति ने माना है कि मरने वाले कुछ मरीज ऐसे थे जो रात भर तमाम अस्पतालों में भटके हैं.

इस वजह से उसमें कुछ की एक या दो दिन में ही मौत हो गई. इनमें से 90 फीसदी डायबिटीज, अस्थमा और हाइपरटेंशन सरीखी पुरानी बीमारियों से भी पीड़ित थे. समिति के जरिये एक खुलासा यह भी हुआ कि कोरोना के अलावा भी अन्य बीमारियों में इलाज न होने से लोगों की मौत हुई.

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डेंगू के एक मरीज को कोरोना के कोई लक्षण नहीं थे बावजूद अचानक सांस लेने में तकलीफ हुई. अस्पतालों में भटके लेकिन किसी ने भर्ती नहीं किया. दो दिन बाद वह पॉजीटिव आ गई लेकिन तब तक उसकी मौत हो गई. धार, झाबुआ, बड़वानी से आए मरीजों को भी यहां लाने में देर की गई.

समिति ने सैंपलिंग और क्वारैंटाइन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए कहा गया है. इसमें तीनों मेडिकल कॉलेजों को यह निर्देश दिए गए हैं कि यह जानकारी ली जाए कि मरीजों को क्यों निजी अस्पतालों से रैफर किया जा रहा है. इसके अलावा यह टिप्पणी भी की गई है कि मरीज निजी अस्पताल जाना इसलिए पसंद कर रहे हैं क्योंकि वहां सफाई और सुविधाएं सरकारी अस्पतालों से बेहतर है.

 

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