मानवता की मिसाल बनीं इंदौर की डॉक्टर, मरने के बाद अंगदान कर बचाई कई जिंदगियां

Shubham Bajpai, Last updated: Fri, 17th Sep 2021, 3:25 PM IST
  • इंदौर की डॉ. संगीता पाटिल ने मानवता की नई मिसाल पेश की. संगीता की एक सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद मौत हो गई थी. जिसके बाद उनके परिवार की सहमति के बाद उनके अंगों को दान दे दिया गया. उनके इन अंगों से कई लोगों की जिंदगी बचाई जा सकी. डॉक्टर ने संगीता को ब्रेन डेड घोषित कर दिया था. 
इंदौर की ऐसी डॉक्टर जिसने जीते जी इलाज करके और मरने के बाद अपने अंगदान करके बचाई कई जिंदगियां

इंदौर. इंदौर की डॉक्टर संगीता पाटिल ने जीते जी तो अपने मरीजों का इलाज कर उनकी जिदंगी बचाई, लेकिन मरने के बाद भी अपने अंगदान करके कई जिंदगियां बचाने का काम किया. संगीता डेंटल सर्जन है और वो एक सड़क दुर्घटना में काफी घायल हो गई थी. इलाज करने के दौरान डॉक्टर ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया. जिसके बाद उनके परिवार की सहमति से इंदौर सोसाइटी फॉर ऑर्गन डोनेशन और कमिश्नर डॉ. पवन कुमार शर्मा की मदद से उनके अंगों को डोनेट किया गया. उनके अंगों में उनके लीवर को भोपाल के एक निजी अस्पताल में भर्ती मरीज को डोनेट किया. जिसे भेजने के लिए ग्रीनडोर बनाया गया. संगीता की आंखें, स्किन, लिवर, किडनी डोनेट की गई है.

भोपाल में लीवर, इंदौर में डोनेट की गई किडनी

डॉ. संगीता की एक किडनी इंदौर के चोइथराम हॉस्पिटल में एक मरीज के ट्रांसप्लांट की गई और दूसरी किडनी इंदौर के सीएचएल हॉस्पिटल में भर्ती मरीज को डोनेट की गई. वहीं, उनका लीवर भोपाल के एक निजी अस्पताल में भर्ती मरीज को डोनेट किया गया. इसके लिए जिला प्रशासन ने ग्रीन कॉरिडोर बनाकर लीवर को भोपाल भेजा.

इंदौर के चौराहे पर बनी वायरल वीडियो की डांसिंग गर्ल पर केस दर्ज, लड़की ने सफाई में जारी की वीडियो

भोपाल और इंदौर के लिए पहली बार बना ग्रीनडोर

प्रशासन ने पहली बार भोपाल से इंदौर के बीच ग्रीन कॉरिडोर बनाया. जिसमें 32 किमी के सफर को 28 मिनट में तय किया गया.ग्रीन कॉरिडोर के लिए इंदौर, देवास, सीहोर और भोपाल के एसपी और प्रशासन को अलर्ट में रखा गया और एंबुलेंस के आगे फॉलो वाहन मौजूद रहा और एंबुलेंस को किसी भी टोल टैक्स में नहीं रोका गया. वहीं, इंदौर से बनाया गया यह 40 वां ग्रीन कॉरिडोर था. जिसे 23 महीने बाद बनाया गया था.

इंदौर में फैशन शो पर हिंदू संगठन का हमला, अश्लीलता और लव जिहाद को बढ़ावा देने का आरोप 

जानकारी अनुसार, ब्रेन डेड में व्यक्ति जीवित तो रहता है, लेकिन उसमें चेतना नहीं होती है. उसकी बॉडी या उसमें किसी तरक का कोई मूवमेंट या रिएक्शन नहीं होता है. किसी व्यक्ति के ब्रेन डेड होने के बाद कुछ समय के अंदर उसकी किडनी, कार्निया, लंग्स, ब्लड वेशल्स, मसल्स एंड लिगामेंट, पेनिस, कर्टिलेजस, हार्ट, लीवर, स्किन, बोनमेरो और पैंक्रियाज को निकालकर डोनेट किया जा सकता है. इससे लिए पहले कानूनी प्रक्रिया भी पूरी करनी पड़ती है.

 

आज का अखबार नहीं पढ़ पाए हैं।हिन्दुस्तान का ePaper पढ़ें |

अन्य खबरें