इंदौर: स्ट्रीट डॉग्स को लेकर डॉगीटाइजेशन ने चलाया 'भारतीय नस्ल सर्वप्रथम' अभियान

Smart News Team, Last updated: 15/08/2020 03:21 PM IST
  • इंदौर में आज स्वतंत्रता दिवस पर स्ट्रीट डॉग्स को लेकर डॉगीटाइजेशन संस्था की ओर से डॉगीटाइजेशन मुहिम शुरू की गई है. इस मुहिम के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी के वोकल फॉर लॉकल को लेकर संदेश दिया गया है. और मांग की गई है कि विदेशी नस्लों के डॉगी,पपीज को बैन कर स्ट्रीट डॉग्स को पाला जाए.
भारतीय नस्ल सर्वप्रथम' अभियान

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जहां पूरा देश जश्न मना रहा है. वहीं इंदौर शहर के जागरूक नागरिकों ने अपने चेहरे पर तिरंगे से खुद को सजाया और साथ ही अपने गोदी में नन्हे मुन्ने, प्यारे प्यारे भारतीय नस्ल के पपीज को लेकर एक ऐसा संदेश दिया जो अब तक के इतिहास में शायद अनूठा ही नहीं सबसे अलग भी है. कोरोना महामारी के चलते भारत में जो सबसे ज्यादा प्रचलित वाक्य है " वोकल फॉर लोकल" के संदेश के डॉगीटाइजेशन संस्था द्वारा समूचे भारत में "स्वदेशी अपनाओ" मुहिम को अपने अलग ही तरीके से सफल बनाने का प्रयास किया गया है.

इंदौर शहर से शुरू हुई "डॉगीटाइजेशन" मुहिम से जुड़े लोगों ने देश को एक बहुत महत्वपूर्ण संदेश दिया कि यदि सड़क पर जी रहे स्ट्रीट डॉग्स के द्वारा डॉग बाइट (काटने) से बचना हैं या या इनकी आबादी को क़ाबू में करना है तो उसे जनभागीदारी के द्वारा ही दूर किया जा सकता है. इसी तर्ज पर एक बहुत महत्वपूर्ण संदेश, देश भर के नागरिकों को दिया गया कि “भारतीय नस्ल सर्वप्रथम”.

संस्था का मानना है कि हमारे देश में बहुत सारे पशु प्रेमी लोग हैं परंतु उनका झुकाव अधिकतर विदेशी नस्ल की तरफ ज्यादा है. जबकि हमारे देश में बहुत सारे स्ट्रीट डॉग्स है जिन्हे भी पाला जा सकता है.

वही संस्था ने पीएम मोदी से अपील की है कि जिस तरह उनहोंने Tik tok पर प्रतिबंध लगाया है उसी तरह वे इन विदेशी नस्ल के जीवों पर भी प्रतिबंध लगाया जाए.

जहां विदेशी नस्ल के डॉग्स 50 हज़ार से 1 लाख रुपए कीमत तक खरीदे और बेचे जाते हैं. इस व्यापार को बंद कर देशी नस्ल के स्ट्रीट डॉग्स का पालन पोषण करने वाले इन्दौर के पशु प्रेमियो ने देश वासियों से आग्रह किया कि जब हमारे देश के देशी नस्लों पर इस तरह की गर्त बनी हुई है. ऐसी स्थिति में हमें विदेशी डॉग्स के व्यापार को उस समय तक बढ़ावा नही देना चाहिए जब तक हमारे अपने देशी डॉग्स को भोजन, पानी, प्यार, नसबन्दी की मदद नहीं मिल जाती है.

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