इंदौर में 2 साल बाद फिर रंगारंग होगा होली का उत्सव, धूमधाम से निकलेगी गेर यात्रा

Smart News Team, Last updated: Tue, 1st Mar 2022, 8:36 PM IST
  •  कोरोना संक्रमण के चलते त्यौहारों पर लगी सभी पाबंदिया हटा ली गई हैं, ऐसे में इंदौर शहर में इस बार फिर 22 मार्च को रंगपंचमी पर गेर निकाला जाएगा, जिसे मुख्यमंत्री ने शनिवार को हरी झंडी दिखाते हुए कहा कि कोरोना जा रहा है. होली-रंगपंचमी धूमधाम से मनाओ, गेर भी निकालो. इसके बाद से ही इंदौर में होली, रंगपंचमी को लेकर उत्साह का माहौल है.
इंदौर में 2 साल बाद फिर रंगारंग होगा होली का उत्सव

इंदौर : कोरोना संक्रमण के चलते त्यौहारों पर लगी सभी पाबंदिया हटा ली गई हैं, ऐसे में इंदौर शहर में इस बार फिर 22 मार्च को रंगपंचमी पर गेर निकाला जाएगा, जिसे मुख्यमंत्री ने शनिवार को हरी झंडी दिखाते हुए कहा कि कोरोना जा रहा है. होली-रंगपंचमी धूमधाम से मनाओ, गेर भी निकालो. इसके बाद से ही इंदौर में होली, रंगपंचमी को लेकर उत्साह का माहौल है.

मुख्यमंत्री के बयान के बाद उत्सव समितियों का गेर निकालने को लेकर उत्साह कई गुना और बढ़ गया है. बता दें कि जिला प्रशासन ने होली, रंगपंचमी समेत सभी धार्मिक आयोजनों पर लगी पाबंदियां हटाने के निर्देश जारी किए हैं. हालांकि जिस रुट से गेर को निकाला जाता है, उसके बड़े हिस्से पर निर्माण कार्य का काम चल रहा है, हालातों को देखते हुए इस साल रुट में बदलाव किया जा सकता है.

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अधिकारियों का इस पर कहना है कि इस बार रंगपंचमी 22 मार्च को मनाई जा रही है. इन दिनों महामारी के मामले घटकर बेहद कम रह गए हैं, जिसको ध्यान में रखते हुए सीएम शिवराज सिंह चौहान ने 26 फरवरी को लोगों से कहा था कि वे होली और रंगपंचमी के त्योहार पूरी धूम-धाम से मनाएं और गेर भी निकालें.

होली की तुलना में रंग पंचमी का अधिक महत्व

बता दें कि इंदौर के लोग रंगों के त्योहार होली की तुलना में रंग पंचमी को अधिक उत्साह के साथ मनाते हैं. गेर को फाग जुलूस के नाम से भी जाना जाता है. इसके दौरान विभिन्न संगठनों द्वारा शहर के कई हिस्सों से निकाला जाता है और रंग-बिरंगे छींटे डाले जाते हैं, साथ ही तोपों के माध्यम से पानी और गुलाल की बौछार की जाती है.

जानिए क्या है गेर उत्सव

इंदौर की गेर का इतिहास काफी पुराना बताया जाता है. इसके लिए मान्यता है कि परंपरा की शुरूआत उस समय हुई, जब होलकर वंश के लोग होली खेलने के लिए रंगपंचमी के मौके पर सड़कों पर निकलते थे. कहा जाता है कि उस समय लोग बैलगाड़ियों में फूलों और प्राकृतिक चाजों से तैयार किए गए रंग और अबीर को लेकर सड़कों पर निकलते थे, जिसे सभी मिलकर एक-दूसरे के साथ मनाते थे.

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