शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से उबर रहा इंदौर, बाहरी छात्रों के साथ बढ़ा प्लेसमेंट

Smart News Team, Last updated: 17/09/2020 11:34 PM IST
  • इंदौर. देवी अहिल्या स्टेट यूनिवर्सिटी के साथ अब यहां नौ निजी यूनिवर्सिटी हो गई हैं. अगले वर्ष दो नई प्राइवेट यूनिवर्सिटी शुरू होंगी, जबकि 2022 में तीन और 2023 में भी एक यूनिवर्सिटी आएगी.
देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी

इंदौर। शिक्षा का हब कहा जाने वाला इंदौर शहर अब वास्तविक मायनों में हायर एजुकेशन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की होड़ में शामिल हो गया है. दरअसल देवी अहिल्या स्टेट यूनिवर्सिटी के साथ अब यहां नौ निजी यूनिवर्सिटी हो गई हैं. अगले वर्ष दो नई प्राइवेट यूनिवर्सिटी शुरू होंगी, जबकि 2022 में तीन और 2023 में भी एक यूनिवर्सिटी आएगी. महज नौ साल पहले 2011 में इंदौर में पहली निजी यूनिवर्सिटी शुरू हुई थी. ओरिएंटल यूनिवर्सिटी की शुरुआत के समय यह अनुमान भी नहीं था कि 2020 में संख्या नौ पर पहुंच जाएगी.

इंदौर में इन यूनिवर्सिटी में छात्र संख्या 25 हजार पार पहुंचने की संभावना है. 2011 के बाद इंदौर में निजी यूनिवर्सिटी की डिमांड तेजी से बढ़ी. इसके बाद ही वैष्णव विद्यापीठ, रेनेसां, सिम्बायोसिस, एपीजे अब्दुल कलाम, मेसीकेप्स, मालवांचल, सेज जैसी यूनिवर्सिटी खुलती गईं. नरसीमुंजी जैसे ऑफ कैम्पस भी शुरू हुए. इस प्रकार यहाँ प्रति वर्ष यूनिवर्सिटी खुलने की प्रक्रिया जारी है.

प्राइवेट यूनिवर्सिटी में बढ़ी बाहरी छात्रों की संख्या

प्राइवेट यूनिवर्सिटी में 40 फीसदी तक बाहरी छात्रों ने प्रवेश लिया. करीब 13% तक कुल एवरेज प्लेसमेंट भी बढ़ गया. जानकारी के अनुसार 2019 में डीएवीवी टीचिंग विभागों की सेंट्रल प्लेसमेंट सेल ने 1280 छात्रों को प्लेसमेंट दिया था, जबकि 10 सरकारी कॉलेजों ने 1300 छात्रों को जॉब दिलवाई. करीब 30 निजी कॉलेजों में प्लेसमेंट के जरिए अलग-अलग कोर्स में चार हजार से ज्यादा जॉब दिलवाई, जबकि बाकी कॉलेजों में करीब 1300 प्लेसमेंट हुए.

इस तरह करीब आठ हजार छात्रों को जॉब मिली, लेकिन इससे अलग सात निजी यूनिवर्सिटी ने 1050 प्लेसमेंट करवाए. इस तरह निजी यूनिवर्सिटी के कारण 13% तक इजाफा हुआ. यूनिवर्सिटी की सेंट्रल प्लेसमेंट सेल के इंचार्ज अवनीश व्यास मानते हैं कि निजी यूनिवर्सिटी आने के बाद हमारी चुनौती बढ़ी है. हम ज्यादा कंपनियों से संपर्क कर हर साल प्लेसमेंट में औसत 12 से 13% का इजाफा कर रहे हैं.

प्राइवेट कॉलजों में गेस्ट फैकल्टी के भरोसे टीचिंग व्यवस्था

इंदौर में सरकारी व प्राइवेट कॉलेजों और सभी यूनिवर्सिटी में मिलाकर टीचिंग स्टाफ के 5900 पद या तो खाली हैं या गेस्ट फैकल्टी के भरोसे चल रहे हैं. चूंकि टीचिंग के लिए पीएचडी अनिवार्य है, लेकिन लॉ, जर्नलिजम, इंग्लिश लिटरेचर और संस्कृत सहित 32 विषयों में पीएचडी के किसी गाइड के पास एक भी सीट खाली नहीं है. ऐसे में निजी यूनिवर्सिटी ने टीचिंग में जाने के लिए प्रयास कर रहे ऐसे लोगों को अलग-अलग विषयों में कुल 200 सीटों के साथ मौका दिया है.

पूर्व कुलपति डॉ. नरेंद्र धाकड़ ने बताया कि मैं तीन साल कुलपति के पद पर रहा. इस दौरान निजी यूनिवर्सिटी से प्रतिस्पर्धा का पूरा ध्यान रखा, इसीलिए 2018-19 में 11 नए स्पेशलाइजेशन कोर्स ऑफर किए. दो साल पहले नैक की ग्रेडिंग की तैयारी की और टीचिंग के 171 खाली पदों पर इंटरव्यू करवाए. आज डीएवीवी के पास ए प्लस ग्रेड है, ताकि 1964 में शुरू हुई हमारी यूनिवर्सिटी हमेशा टॉप पर रहे.

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इंदौर बहुत तेजी से एजुकेशन हब के रूप में उभरा

इंदौर के तीन बड़े एजुकेशन ग्रुप निजी यूनिवर्सिटी शुरू कर चुके हैं और सफलतापूर्वक चला भी रहे हैं, जबकि 2 ग्रुप अगले साल शुरू करने जा रहे हैं. 5 ग्रुप बाहर के हैं, जिन्होंने यहां यूनिवर्सिटी शुरू की. तीन और बाहर के ग्रुप आएंगे.

शिक्षा के जानकारों का कहना है कि इंदौर बहुत तेजी से एजुकेशन हब के रूप में उभर रहा है. यहां जल्द ही बहुत सारे अन्य कॉलेज, कोचिंग संस्थान और यूनिविर्सटी आने वाले हैं. इससे इंदौर में शिक्षा को और भी बढ़ावा मिलेगा.

 

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