इंदौर: किशोरी की हत्या करने वाले किशोर ने माता पिता के सामने ना जाने की गुहार

Smart News Team, Last updated: 09/09/2020 09:32 AM IST
  • इंदौर. संरक्षण गृह में पुलिस से मां बाप के सामने ना ले जाने की कर रहा था मिन्नत मेरे मम्मी-पापा को मेरे सामने मत लाना नहीं तो वे मुझे मारेंगे किशोरी की हत्या करने वाले बच्चे को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष किया गया पेश डीआईजी ने बच्चे को लेकर अफसरों को सामान्य ढंग से पूछताछ के दिए थे निर्देश
घटनास्थल

इंदौर। 10 वर्षीय बालिका की पत्थर से सिर कूंचकर हत्या करने वाले किशोर को पुलिस ने संरक्षण गृह में रखा. इस दौरान पुलिस बच्चे से एक एक बात की जानकारी ले रही थी. डीआईजी के कड़े निर्देश के बाद पुलिस भी किशोर से बेहद नरमी से पेश आ रही थी. इस दौरान किशोर द्वारा बार-बार पुलिस से अपने माता पिता के सामने ना ले जाने की गुहार की जा रही थी.

किशोर ने पुलिस से कहा कि उसे माता पिता के सामने ना लाएं नहीं तो पापा उसकी पिटाई करेंगे. 12 वर्षीय बालक माता-पिता से न मिलने के लिए पुलिस वालों से गुहार लगाता रहा. रात में पुलिस ने हत्याकांड में खुलासे के बाद उसे परदेशीपुरा स्थित बाल संरक्षण गृह में रखा तो वह रात भर यही कहता रहा कि मेरे मम्मी-पापा को मेरे सामने मत लाना नहीं तो वे मुझे मारेंगे. हालांकि डीआईजी ने बच्चे को लेकर अफसरों को सामान्य ढंग से पूछताछ के निर्देश दिए थे.

अफसरों ने बताया कि बच्चे को अभी हत्या जैसे संगीन अपराध का बोध तक नहीं है. वह सामान्य है. बार-बार मृतका बालिका को लेकर यही बोलता है कि वह फ्री फायर गेम में मुझे हरा देती थी. मैं उसके भाई के साथ भी खेलता था तो उसमें भी वह उसका साथ देकर मुझे हरा देती थी इसलिए मुझे उस पर गुस्सा आता था.

यही नहीं उसने रात में फिर अफसरों को यही बताया कि बालिका ने मेरी प्यारी सफेद चुहिया (पिंकी) को भी घर ले जाकर मार दिया था और गाड़ दिया था. इससे मैं काफी दुखी था. बच्चे द्वारा बार-बार दो बातों का जिक्र किया जा रहा था जिसमें फ्री फायर गेम में उसे हराने की घटना प्रमुख थी. जबकि दूसरी घटना उसकी सफेद चुहिया पिंकी की मौत थी. इन दोनों ही बातों से उसके मस्तिष्क में गहरा आघात पहुंचा था. यही बात उसके दिलो-दिमाग से बार-बार घूम रही थी.

लसूड़िया थाने के एसएआई अनिल सिलावट ने बताया कि मंगलवार को बालक को बाल संरक्षण गृह से किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया गया.बोर्ड के आदेश पर उसे बाल संरक्षण गृह में ही रखे जाने के निर्देश दिए हैं.अपचारी बालक अभी पूरी तरह से स्वस्थ है. उसने बताया कि बालिका और वे दोनों साथ में ही खेलते थे, लेकिन बार-बार उससे हारना अच्छा नहीं लगता था. वह हराने के बाद चिड़ाती थी.

 

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