इंदौर:अरबिंदो मेडिकल कॉलेज के पीजी छात्र की इलाज के दौरान मौत

Smart News Team, Last updated: 08/09/2020 09:53 AM IST
  • कोरोना के लक्षण दिखने पर लिए गए थे सैंपल, टेस्ट रिपोर्ट आई थी निगेटिव अस्पताल के प्रशासनिक अधिकारी डॉ. राजीव सिंह ने बताया कि डॉ. मरावी को सिकल सेल एनीमिया की थी बीमारी सिटी स्केन में लंग्स में 10 फीसदी पाया गया इंफेक्शन.
प्रतीकात्मक तस्वीर 

इंदौर। अरबिंदो मेडिकल कॉलेज के पीजी डॉक्टर की सोमवार को इलाज़ के दौरान मौत हो गई. परिजनों द्वारा अस्पताल प्रबंधन पर इलाज के दौरान लापरवाही किए जाने का आरोप लगाया गया. इस दौरान परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर आरोप लगाते हुए प्रदर्शन भी किया. इसके बाद मौके पर मौके पर पहुंची पुलिस ने मामले को शांत कराया.

अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि शुरुआती लक्षण दिखने के बाद सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे. उनकी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आई थी. कोरोना के शुरुआती लक्षण के बाद एनेस्थीसिया विभाग के पीजी डॉक्टर प्रवेश मरावी का 2 सितंबर को सैंपल लिया गया था. अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि सैंपल लिए जाने के बाद से ही उनका इलाज शुरू कर दिया गया था.इलाज के दौरान कोई लापरवाही नहीं बरती गयी. संस्थान से जुड़े हुए कर्मचारियों के साथ अस्पताल प्रबंधन भेदभाव नहीं रखता. उन्हें बेहतर सुविधा उपलब्ध कराई गई थी.

3 को रिपोर्ट निगेटिव आई थी, लेकिन सिटी स्कैन में लंग्स में इंफेक्शन दिखा था. इसी कारण उन्हें वहीं पर अस्पताल में एडमिट कर इलाज़ शुरू किया गया था. बताते हैं कि वे पहले से सिकल सेल एनीमिया के मरीज़ थे, इसी कारण अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि इनकी ड्यूटी कोविड वार्ड में नहीं लगाई गई थी. इसलिए 3 तारीख़ से लगातार उनका इलाज़ भी चल रहा था. हालांकि अस्पताल प्रंबधन ने परिवार को सूचना 2 दिन पहले दी. उनकी पत्नी छिंदवाड़ा मेडिकल कॉलेज में पदस्थ हैं.

इलाज़ चल रहा था, कोरोना रिपोर्ट आई थी पॉजिटिव

अस्पताल के प्रशासनिक अधिकारी डॉ. राजीव सिंह ने बताया कि डॉ. मरावी को सिकल सेल एनीमिया था, कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आई थी. उनका इलाज चल रहा था.

सिटी स्कैन में लंग्स में 10 फीसदी तक इंफेक्शन जरूर आया था. उसका भी इलाज़ चल रहा था. इधर, यह बात सामने आई है कि परिवार का कहना कि कोरोना रिपोर्ट निगेटिव या पॉजिटिव आने की संभावना रहती है और डॉ. मरावी को कोरोना के शुरुआती लक्षणों के बाद ही अस्पताल में भर्ती किया गया था. फिर ध्यान क्यों नहीं रखा गया.

परिवार का दावा है कि अभी उनमें कोरोना के शुरुआती लक्षण दिखाई दे रहे थे इसलिए उनकी रिपोर्ट नेगेटिव आई थी. अस्पताल की लापरवाही के चलते ही उनकी मौत हुई है.

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