इंदौर: योजना के नाम पर करोड़ों का घोटाला, चाय की दुकान पर रची जाती थी साजिश

Smart News Team, Last updated: 19/09/2020 02:09 PM IST
  • अनपढ़, बेरोजगार और जरूरतमंदों के नाम से स्वीकृत करीब 5 करोड़ रुपये की ऋण राशि ये आपस में बांट चुके हैं ,मुद्रा ऋण योजना के नाम पर करोड़ों रुपये का घोटाला, वही साइबर सेल के पुलिस अधीक्षक जितेंद्रसिंह टिफिन सेंटर के संचालक शैलेंद्र वर्मा (सुदामा नगर) की शिकायत पर धोखाधड़ी की जांच कर रहे थे.
प्रधानमंत्री मुद्रा ऋण योजना

इंदौर. प्रधानमंत्री मुद्रा ऋण योजना के नाम पर करोड़ों रुपये का घोटाला राज्य साइबर सेल ने पकड़ा है. साजिश स्कीम-71 स्थित चाय की दुकान पर रची जाती थी. इसमें राष्ट्रीयकृत बैंकों के कई अधिकारी भी शामिल होते थे. अनपढ़, बेरोजगार और जरूरतमंदों के नाम से स्वीकृत करीब 5 करोड़ रुपये की ऋण राशि ये आपस में बांट चुके हैं . वही साइबर सेल के पुलिस अधीक्षक जितेंद्रसिंह टिफिन सेंटर के संचालक शैलेंद्र वर्मा (सुदामा नगर) की शिकायत पर धोखाधड़ी की जांच कर रहे थे.

शर्मा के नाम पर यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (स्कीम-54) से किसी ने ऋण ले लिया था. जांच में दलाल महेश दुबे, पिंटू कजरे, सोनू पंवार, बैंक के सहायक प्रबंधक अरुण जैन, ताइक्वांडो खिलाड़ी विशाल डांगी और ऑनलाइन सेंटर संचालक दीपक पंवार शामिल मिले. आरोपितों ने जाली दस्तावेजों से शैलेंद्र के नाम से 7 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत करवाया. पुलिस ने सभी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया.

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वही इस मामले पर जांच अधिकारी रामप्रकाश वाजपेयी ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से रिकॉर्ड मांगा तो बताया कि ऋण शैलेंद्र चिल्ड वाटर के लिए स्वीकृत हुआ है. तस्दीक करने पहुंची टीम ने देखा कि वहां वाटर प्लांट ही नहीं था. इसके लिए अवतार स्पेयर सेंटर द्वारा मटेरियल सप्लाई करना दर्शाया गया था. वाजपेयी ने कंपनी के संचालक विशाल डांगी की जानकारी जुटाई तो पता चला कि उसे इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी जबकि उसके इंदौर प्रीमियम कोऑपरेटिव बैंक के खाते में 63 लाख रुपये का लेन-देन मिला. यह पीएम मुद्रा ऋण की रकम थी.

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केस की विवेचना से खुश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने पुलिस अधीक्षक से कहा कि यह जनहित का मामला है. इसकी बारीकी से जांच होनी चाहिए. आगे जांच में पता चला कि डांगी के खाते में आए रुपये सोनू और पिंटू के खाते में ट्रांसफर हो रहे हैं. इससे शक गहरा गया और दोनों के खाते खंगाले गए तो पिंटू के खाते में पौने दो करोड़ और सोनू के खाते में तीन करोड़ 45 लाख रुपये का लेनदेन मिला. रुपये स्कीम-54, स्कीम 78 और भौंरासला स्थित शाखा से जारी किए गए थे साथ ही पुलिस अधीक्षक की माने तो आरोपियों ने बताया कि साजिश स्कीम-71 स्थित 'चायवाला' दुकान पर रची जाती थी. ऋण के लिए ऑनलाइन फॉर्म दीपक पंवार (काछी मोहल्ला) के यहां से सबमिट किए जाते थे. साइबर सेल अधिकारियों को शक है कि इस घोटाले में बैंक अधिकारियों के साथ सो लोग शामिल हो सकते हैं.

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