इंदौर:गरीबों को दिए जाने वाले राशन में हुआ घोटाला जांच में आपूर्ति विभाग के अफसर

Smart News Team, Last updated: 14/09/2020 04:22 PM IST
  • इंदौर. महू मंडी में अधिकारियों की मिलीभगत से यह पूरा घालमेल किया गया है. हमारा कार्य तो केवल राशन को डीलरों तक पहुंचाने का था. जिसकी जानकारी प्रशासनिक अधिकारियों को हुई तो उन्होंने इस मामले पर जांच बैठा दी.
प्रतीकात्मक तस्वीर 

इंदौर| इंदौर के महू में राशन घोटाले का मामला प्रकाश में आया है. जिसमें मंडी के अधिकारियों की भी मिलीभगत सामने आई है. प्रशासन ने जांच रिपोर्ट में मंडी अधिकारियों के साथ-साथ खाद्य विभाग और नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों को जांच के दायरे में लिया है. इसके अलावा ट्रांसपोर्टर पर भी शिकंजा कसा जा सकता है.

राशन घोटाले की जांच कर रहे अधिकारियों ने बताया कि महू मंडी में अधिकारियों की मिलीभगत से यह पूरा घालमेल किया गया है. मंडी अधिकारियों के साथ खाद्य विभाग और नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों की भी संलिप्तता समझ में आ रही है. राशन ट्रांसपोर्टर मोहनलाल अग्रवाल ने बताया कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली की राशन की दुकानों पर कितना राशन दिया जा रहा है इसकी निगरानी न तो नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों ने की और न ही खाद विभाग के अधिकारियों ने. बताया हमारा कार्य तो केवल राशन को डीलरों तक पहुंचाने का था.

बताते चलें कि राशन ट्रांसपोर्ट अग्रवाल और उसके बेटे ने अन्य रिश्तेदारों से मिलकर एक फर्जी मंडी अनुज्ञा बनाकर गरीबों के मिलने वाले मुफ्त राशन को सस्ते में अपना माल बनाकर बाजार में ऊंचे भाव में बेच दिया था. जिसकी जानकारी प्रशासनिक अधिकारियों को हुई तो उन्होंने इस मामले पर जांच बैठा दी. प्रशासन की रिपोर्ट को लेकर नान के जिला प्रबंधक एस के दलाल ने बताया अभी तक उन्हें रिपोर्ट नहीं मिली है. रिपोर्ट मिलने और उच्च स्तर से निर्देशों के आधार पर संबंधित ट्रांसपोर्टर के खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी. रिपोर्ट में उनके खिलाफ क्या लिखा गया है इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है.

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बताया कि उनका काम राशन दुकान तक पहुंचाना है. आगे निगरानी की जिम्मेदारी खाद विभाग के अधिकारियों की होती है. खाद्य नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग में राशन सरकारी गोदाम से लेकर हर गांव और शहर में उचित मूल्य की दुकानों पर पहुंचाने के लिए निगरानी तंत्र विकसित किया गया था. गाड़ियों पर जीपीएस लगा हुआ था. मगर भ्रष्ट व्यवस्था ने इसे नहीं चलने दिया. पांच-छह साल पहले सरकारी तंत्र और ठेकेदारों की मिलीभगत से इस व्यवस्था को नाकाम साबित कर बंद कर दिया गया. बताया कि ठेकेदार नहीं चाहते थे कि उन पर इस तरह से निगरानी की जाए और इसी तरह से राशन घोटाले का खेल चलता रहा.

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