इंदौर सहित समूचे प्रदेश में ब्लैक फंगस के दवाई की बढ़ी माँग, प्रशासन सतर्क

Smart News Team, Last updated: Sun, 16th May 2021, 7:05 PM IST
  • इंदौर में ब्लैक फंगस के इलाज में कारगर दवाई एम्फोटेरिसिन बी की आई कमी, प्रशासन और सरकार व्यवस्था में जुटी. कलेक्टर मनीष सिंह ने कहा अस्पताल, डीलर्स और स्टॉकिस्टों से बात जारी.
प्रतिकात्मक तस्वीर 

इंदौर. इंदौर में कोरोना महामारी के दौर की समस्या अभी समाप्त हुई नहीं है और ब्लैक फंगस इंफेक्शन ने जिला प्रशासन सहित मरीजों की चिंता बढ़ा दी है. ब्लैक फंगस की आवश्यक दवाइयों की मांग इतनी अधिक हो गई है की अब उसकी कालाबाजारी भी शुरू होने लगी है. वही मरीजों की संख्या की रफ्तार इतनी तेजी से बढ़ रही है कि 1 साल में जितनी दवाई उपयोग में आती है वो अब 7 दिन में ही खत्म होने लगी है. मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में भी ये ही हालात बन गए है. हालांकि,यहां ब्लैक फंगस की दवाइयों की कालाबाजारी की कोई आधिकारिक शिकायत सामने नही आई है. वही विशेषज्ञ डॉक्टर अमित रावत की माने तो शहर के एम.वाय. अस्पताल में अब तक मरीजो की संख्या दो दर्जन से ज्यादा हो चुकी है. इंदौर में ब्लैक फंगस के दर्जनों मामले सामने आने के बाद जिला प्रशासन द्वारा अरविंदो अस्पताल व एम.वाय. हॉस्पिटल में ब्लैक फंगस से ग्रसित मरीजों के उपचार की व्यवस्था की गई है. 

 

इसी को लेकर कलेक्टर मनीष सिंह का कहना है कि पिछले दिनों ब्लैक फंगस को लेकर जनप्रतिनिधियों वरिष्ठ डॉक्टरों सहित अन्य अधिकारियों के साथ बैठक कर यह सुनिश्चित किया गया था कि इस महामारी के दौर में ब्लैक फंगस इंफेक्शन से ग्रसित मरीजों को उचित इलाज किस तरह से मुहैया कराया जा सके और इसके लिए पूरी कार्यप्रणाली भी तैयार की गई थी. जिसमें डॉक्टरों से चर्चा के साथ मेडिकल दवाओं के विक्रेताओं से भी चर्चा की गई थी. जानकारी के मुताबिक इस बीमारी में उपयोग आने वाली दवाओं की खपत काफी बढ़ गई है . इन दवाओं की आपूर्ति के लिए भी केंद्र से लेकर राज्य सरकार स्तर पर चर्चा जारी है ताकि बीमारी से लड़ा जा सके और मरीजों को राहत पहुंचाई जा सके.

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दरअसल, ब्लैक फंगस का इलाज करने के लिए एंटीफंगल इंजेक्शन दिया जाता है. ऐसा ही एक इंजेक्शन है एम्फोटेरिसिन बी, जो पीले रंग का इंजेक्शन होता है .उसकी डिमांड ज्यादा हो गई है. वही जमाखोरी और बढ़ते मरीजो की संख्या के चलते मार्केट में इस दवाई की कमी आ गई है.  

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