छत पर तुलसी के सामने रखे दिये से मासूम बच्ची की मौत, सदमे में दादा ने भी तोड़ा दम

Indrajeet kumar, Last updated: Thu, 11th Nov 2021, 10:11 AM IST
  • इंदौर के बाणगंगा थाना क्षेत्र में छत पर रखे तुलसी के पौधे के पास जल रहे दीया से झुलसकर एक मासूम बच्ची की मौत हो गई. जानकारी मिलते ही पड़ोस और परिवार के लोगों ने बच्ची को अस्पताल में भर्ती कराया जहां 6 घंटे की इलाज के बाद उसकी मौत हो गई. बच्ची की मौत की खबर सुनने के बाद सदमे में आए उसके दादा की भी मौत हो गई.
प्रतीकात्मक फोटो

इंदौर. इंदौर के बाणगंगा थाना क्षेत्र में आग से झुलस के चार साल की एक बच्ची की मौत हो गई. बच्ची के परिजनों ने छत पर तुलसी के पौधे के पास दीया जलाया था. इसी दीया से खेलने के दौरान बच्ची के कपड़ों में आग लग गई. जिसके बाद बच्ची को जली हुई गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती किया गया जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. बच्ची की मौत के बाद सदमे से उसके दादा की भी मौत हो गई. मृत बच्ची के चाचा बताया कि श्रुति के पिता-पिता प्लास्टिक फैक्ट्री में काम करते हैं. मां भी शाम को काम पर चली गई थी. श्रुति शाम करीब 6 बजे छत पर लगे तुलसी के पौधे के पास जल रहे दिये से खेल रही थी. इसी दौरान दिये से बच्ची के कपड़ों में आग लग गई. जिसके बाद बच्ची दादा के पास पहुंची और चिल्लाते हुए बोली दादा मेरे ऊपर पानी डालो मैं जल रही हूं. जिसके बाद दादा नींद से जागे और आग बुझाई. लेकिन तब तक श्रुति काफी जल चुकी थी.

घटना के बाद परिजन तुरंत श्रुति को लेकर निजी अस्पताल पहुंचे. लेकिन निजी अस्पताल ने उसे एमवाई अस्पताल रेफर कर दिया. अस्पताल में उसने पुलिस को दिए बयान में कहा कि दिया से खेलते हुए उसके कपड़ों में आग लग गई. जिसके बाद वह चैट पर लगे नल को खोलकर आग बुझाने की कोशिश भी की. लेकिन उसका हाथ नल तक नहीं पहुंचा. इसके बाद वह दौड़ते हुए दादा के पास आई लेकिन तब तक वह 95 प्रतिशत जल चुकी थी. अस्पताल में करीब 6 घंटे के इलाज के बाद श्रुति की मौत हो गई. पुलिस ने बुधवार को बच्ची का पोस्टमार्टम कराकर शव स्वजनों को सौंप दिया.

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सदमे से हुई दादा की मौत

श्रुति के दादा भागचंद के सामने ही ये घटना हुई थी. जली हुई हालत में जब श्रुति उनके सामने पहुंची तो उन्होंने बच्ची की आग बुझाई. बच्ची बार-बार कह रही थी दादा मेरे ऊपर पानी डालकर आग बुझाओ जिसके बाद दादा ने आग बुझाकर उसके जले हुए कपड़े निकाले. घर के नीचे वाले हिस्से में श्रुति का भाई गतिक और श्रुति की मौसी के कार्तिक और कृतिका भी खेल रहे थे. दोनों भागकर ऊपर आए और उन्होंने पड़ोसियों को आवाज लगाई जिसके बाद पड़ोसियों की मदद से उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया. शाम को बच्ची के अंतिम संस्कार के बाद दादा की अचानक तबियत अचानक से बिगड़ी और संस फूलने लगी. इसके कुछ देर बाद ही दादा की भी मौत हो गई.

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