पीएम मोदी बोले- इंदौर के लोग सिर्फ सेव नहीं खाते, शहर की सेवा करना भी जानते हैं

Naveen Kumar, Last updated: Sat, 19th Feb 2022, 3:33 PM IST
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को इंदौर में दक्षिण एशिया के सबसे बड़े बायो-सीएनजी प्लांट का वर्चुअली उद्धाटन किया. इस दौरान पीएम मोदी ने कहा, 'इंदौर के लोग सिर्फ सेव के शौकीन नहीं है. यहां के लोग अपने शहर की सेवा करना भी जानते हैं'.
फाइल फोटो

इंदौर. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को इंदौर में दक्षिण एशिया के सबसे बड़े बायो-सीएनजी प्लांट का वर्चुअली उद्धाटन किया. इस प्लांट को 150 करोड़ की लागत से तैयार किया गया है, जिससे प्रतिदिन 550 मीट्रिक टन गीले कचरे का निपटान होगा. यह एशिया का सबसे बड़ा बायो सीएनजी प्लांट है. पीएम मोदी ने इस प्रोजेक्ट के पूर्ण होने पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनकी टीम को भी बधाई दी. इस दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, 'मुझे खुशी है कि आगामी दो वर्षों में देश के 75 बड़े नगर निकायों में ऐसे गोबर-धन प्लांट, ऐसे बायो-सीएनजी प्लांट बनाने का काम शुरू किया जाएगा. यह देश के शहरों को स्वच्छ, प्रदूषण मुक्त बनाने में मददगार साबित होंगे.' 

बता दें कि एशिया का सबसे बड़ा बायो-सीएनजी प्लांट इंदौर के देवगुराडिया ट्रेंचिंग ग्राउंड में है. कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने कहा, इंदौर के लोग सिर्फ सेव के शौकीन नहीं है. यहां के लोग अपने शहर की सेवा करना भी जानते हैं. आज का दिन स्वच्छता का दिन है. इंदौर के स्वच्छता अभियान में यह प्रोजेक्ट नया पुश है. यह हमारे और हमारे पर्यावरण के लिए काफी महत्वपूर्ण है. गांवों में घरों, जानवरों और खेतों से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थ "गोबर धन" के समान हैं. इस दौरान पीएम मोदी ने लगातार 5 वर्षों तक स्वच्छता सर्वे में अव्वल रहने वाले इंदौर शहर के लोगों की जमकर तारीफ की.

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क्यों खास है इंदौर का बायो-सीएनजी प्लांट ?

15 एकड़ जमीन में फैला इंदौर का बायो-सीएनजी प्लांट एशिया का सबसे बड़ा प्लांट है. इसे 150 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है. इसकी रोजाना प्रोसेसिंग की क्षमता 550 मीट्रिक टन है. यह प्लांट प्रतिदिन 17,500 किलोग्राम बायोगैस और 100 टन उच्च गुणवत्ता वाली खाद पैदा करने की क्षमता रखता है. 100 फीसदी गीले कचरे से बायोगैस पैदा होगी. इसके अलावा संयंत्र 96 प्रतिशत शुद्ध मीथेन गैस के साथ सीएनजी का उत्पादन करेगा. उत्पादित बायोगैस का 50 प्रतिशत सार्वजनिक परिवहन वाहनों को चलाने के लिए प्रदान किया जाएगा, जबकि शेष विभिन्न उद्योगों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा. इंदौर में करीब 400 बसें जल्द ही प्लांट से निकलने वाली बायोगैस से चल सकती हैं.

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