मध्यप्रदेश गोटमार मेले में एक-दूसरे पर पत्थरबाजी से चार सौ लोग घायल, ये है कारण

Nawab Ali, Last updated: Wed, 8th Sep 2021, 4:33 PM IST
  • माध्याप्रदेश के छिंदवाड़ा में हर कर्ष लगने वाले गोटमार मेले में इस बार 400 से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं. गोटमार मेले में एक-दूसरे को पत्थर मारने की रस्म है जिसके चलते 400 से ज्यादा लोग जख्मी हो गए. जिनमे दो लोगों की हालात गंभीर हाई जिन्हें नागपुर अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
मध्यप्रदेश गोटमार मेले में पत्थरबाजी से चार सौ लोग घायल.

इंदौर. मध्यप्रदेश के छिंदवाडा जिले में गोटमार मेले में 400 से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं. जिनमें दो लोगों की हालत गंभीर है जिन्हें नागपुर अस्पताल में भर्ती कराया गया है. छिंदवाड़ा जिले में हर वस्ढ़ गोटमार मेले का आयोजन किया जाता है सदियों पुराणी परंपरा के अनुसार लोग एक-दूसरे पर पत्थरबाजी करते हैं. हर वर्ष आयोजित होने वाले इस मेले में सैंकड़ों लोग पत्थरबाजी में घायल होते हैं लेकिन बार भी 400 से ज्यादा लोग पत्थरबाजी मेघायल हुए हैं. जिया प्रशासन ने घायलों को अस्पताल पहुंचाया.

मध्यप्रदेश के छिंदवाडा जिले में हर साल जाम नदी के तट पर गोटमार मेले आयोजन किया जाता है. गोटमार मेले में 300 साल पुरानी परंपरा के चलते दो गाँवों के लोग इस मेले एक-दूसरे पर पत्थरबाजी करते हैं. हर साल इस मेले सैंकड़ो की तादाद में लोग घायल होते हैं. इस साल गोटमार मेले में नाबालिग घायलों की संख्या ज्यादा है. हैरानी की बात तो यह है की मेले का आयोजन पुलिस व प्रशासन की मौजूदगी में होता है. इस बार भी इस मेले में एक हजार से ज्यादा पुलिसकर्मियों और 35 डॉक्टरों को तैनात किया गया था. साथ ही मेले में कई एम्बुलेंस का भी प्रबंध किया गया था. इसके अलावा पुलिस लोगों पर ड्रोन के जरिये भी नजर रख रही थी.

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कलेक्टर सौरभ कुमार सुमन ने बताया है कि लोगों से गोटमार मेले को प्रतीकात्मक तरीके से मनाने की अपील की गई थी. पत्थरबाजी में 400 लोगों के घायल होने का आंकड़ा सामने आया है. सभी लोगों को उपचार दिया जा रहा है. गोटमार मेले का आयोजन एक युवक और युवती की प्रेमकहानी की य्याद में आयोजन किया जाता है. प्रेमी युगल अलग-अलग गांव के होने के कारण युवक युवत को अपने गांव पांढुर्ना लाने लगा. युवती के सावरगांव के लोगों को खबर लगने के बाद युवक-युवती को जाम नदी के बीच सावरगांव के लोगों ने पत्थर बरसाने शुरू कर दिए जिसके बाद युवक के गांव वालों ने भी पांढुर्ना पर पत्थर बरसाने शुरू कर दिए जिसके बाद से ही यह परंपरा शुरू हुई.

 

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