शिवराज मामा की कन्यादान योजना में घोटाला, फर्जी शादी बोलकर डकार गए 18 करोड़

Swati Gautam, Last updated: Thu, 3rd Feb 2022, 9:53 PM IST
  • मामा के नाम से मशहूर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में घोटाले का पर्दाफाश हुआ है. आर्थिक अपराध अन्वेषण प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने गुरुवार को विदिशा जनपद के सीईओ शोभित त्रिपाठी सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. योजना के तहत फर्जी शादी के नाम पर 18 करोड़ का गबन कर लिया गया है.
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (फाइल फोटो)

इंदौर. मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में घोटाले को लेकर बड़ी करवाई हुई हैं. आर्थिक अपराध अन्वेषण प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने गुरुवार को जनपद सीईओ शोभित त्रिपाठी सहित तीन लोगों की गिरफ्तारी की है. इन पर आरोप है कि मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत फर्जी शादी के नाम पर 18.52 करोड़ रुपये की हेराफेरी की. यह मामला तब उजागर हुआ जब सिरोंज से बीजेपी के ही विधायक ने इसका मुद्दा विधानसभा में उठाया था. अरेस्ट हुए शोभित त्रिपाठी लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) मंत्री गोपाल भार्गव के रिश्तेदार बताए जा रहे हैं. बता दें कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी इस घोटाले पर नाराजगी जताई. इसके बाद CEO शोभित त्रिपाठी को निलंबित कर दिया था.

बता दें कि भाजपा विधायक उमाकांत शर्मा द्वारा विधानसभा के शीतकालीन सत्र में मामला उठाए जाने के बाद राज्य पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने मामले की जांच शुरू थी. जिसके बाद 7 जनवरी को मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई. विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम ने श्रम मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह को जांच के आदेश दिए थे. पुलिस अधीक्षक (ईओडब्ल्यू) राजेश तिवारी ने बताया कि तत्कालीन सीईओ शोभित त्रिपाठी समेत क्लर्क योगेंद्र शर्मा और जितेंद्र साहू को गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया गया है. इन्होंने योजना के तहत 5 हजार 923 विवाह के फर्जी मामले स्वीकृत कर 30 करोड़ 18 लाख 39 हजार सरकारी रुपए का पेमेंट किया था.

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जांच में सामने आया है कि मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत घोटाले में 27 साल के युवक की तीन बेटियों की शादी करा दी गई. तीनों के नाम पर 51-51 हजार रुपए स्वीकृत कर पैसा निकाल लिया गया. कई ऐसे लोग भी सामने आए, जिन्होंने सहायता के लिए आवेदन भी नहीं दिया था और जिनकी पहले से शादी हो चुकी थी उन्हें भी सरकारी पैसे ट्रांफर करा दिए. ईओडब्ल्यू को जांच में पता चला कि पैसा लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर नहीं किया गया था, बल्कि अज्ञात लोगों के खाते में ट्रांसफर कर दिया गया था. यह पैसा उस समय ट्रांसफर किया गया जब कोविड -19 लॉकडाउन के कारण शादियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था.

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