थानों में ज़ब्त रेमेडेसिवीर का इलाज में होगा उपयोग, हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान

Smart News Team, Last updated: Thu, 20th May 2021, 1:02 PM IST
  • जब्त रेमडेसिविर को लेकर लगाई गई जनहित याचिका के बाद मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने सुनाया फैसला . जब्त रेमडेसिविर इंजेक्शन जांच के बाद मरीजो को कराए जा सकेंगे मुहैया. न्यायालयों को तीन दिन मे निर्णीत करनी होगी सुपुर्दगी की अर्जी, हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान याचिका मे दिया आदेश.
हाईकोर्ट की इंदौर खण्डपीठ ने रेमेडेसिवीर मामले का संज्ञान लिया .

इंदौर. इंदौर सहित समूचे मध्यप्रदेश में रेमडेसिविर इंजेक्शन की चोरी और कालाबाजारी के पिछले एक माह में सैकड़ों प्रकरण सामने आए हैं और पुलिस कार्रवाई के दौरान, पुलिस के हाथ कई असली रेमडेसिविर और अन्य जीवनरक्षक दवाएं हाथ लगी है. ऐसे में जब्त किये गए असली रेमडेसिविर इंजेक्शन अलग - अलग थानो में जब्त स्थिति में रखे - रखे खराब हो रहे है. इसी मामले को लेकर हाईकोर्ट अधिवक्ता आशुतोष शर्मा के माध्यम से लखन शर्मा नामक युवक ने हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी .जिसके पश्चात उच्च न्यायालय के द्वारा संज्ञान मे ली गई याचिका मे पूरे प्रदेश मे लागू होने वाला आदेश पारित किया गया है.

 याचिकाकर्ता के अधिवक्ता आशुतोष शर्मा ने बताया है की याचिका और स्वत:- संज्ञान याचिका मे  हमने एक महत्व पूर्ण बिंदु उठाया है जिस ओर किसी का ध्यान नही जा रहा था. रेमडेसिविर कालाबाजारी और चोरी तो हो रही है परंतु उसमे जब्त हो रही यह बहुमुल्य दवाई पुलिस की कस्टडी मे खराब हो रही है .जिसका उपयोग आज के परिदृश्य मे अत्यंत आवश्यक है. लिहाजा, अधिवक्ता ने न्यायालय के समक्ष बिंदु प्रस्तुत किये है की आज जब निजी हॉस्पिटल में मरीजों को सरकार उनके अनुसार रेमडेसिविर इंजेक्शन उपलब्ध नहीं करवा पा रही है तो प्रशासन इन जीवन रक्षक दवाइयों को उचित तरीके से जनता के उपयोग में ले ताकि जितने भी डोज प्राप्त हो उनसे प्रदेश मे कितने ही गंभीर मरीजों का जीवन बचाया जा सकता है.

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जनहित की याचिका के पश्चात् मुख्य याचिका मे इंटर्वेनेर बनने की अनुमति पर सुनवाई मे अब न्यायलय ने विस्तृत आदेश पारित किया है. हाईकोर्ट ने इंटर्वेनेर अर्जी को स्वीकार करते हुए अपने आदेश मे समस्त जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को जब्त इंजेक्शन को अपने सुपुर्दगी मे लेने का आदेश दिया है और इन दवाइयों की फॉरेंसिक जांच के बाद जनता के लिए उपयोग मे लाने को कहा है. साथ ही न्यायालयों को सीएमएचओ द्वारा लगने वाली अर्जी को तीन दिन के भीतर निर्णय देने का आदेश दिया है.इस प्रकार के जब्त रेमडेसिविर इंजेक्शन के उपयोग से कितने ही लोगों के जीवन को बचाया जा सकता है. जनहित के आदेश को लेकर हाईकोर्ट अधिवक्ता आशुतोष शर्मा ने बताया कि हमने माननीय उच्च न्यायालय में जनहित की एक याचिका प्रस्तुत की थी जिसमे न्यायालय से निवेदन किया था कि कोरोना की दूसरी वेभ में रेमडेसिविर की उपयोगिता बढ़ गई हैऔर इस दौरान रेमडेसिविर के  कालाबाजारी के मामले में भी सामने आए हैं. जिसे पुलिस ने जब्त किए हुए हैं. जिसके बाद हमने निवेदन किया कि न्यायालय राज्य सरकार को आदेश देकर जब्त इंजेक्शन को उचित लोगो के स्वास्थ्य सुधार के काम लाया जा सके इसके लिए उचित निर्णय दे. जिसके बाद एक बड़ा फैसला माननीय न्यायालय ने सुनाया है.

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