Ganesh Chaturthi 2021: यहां है विश्व की सबसे ऊंची श्री गणेश की विशाल प्रतिमा, बड़े गणपति के श्रृंगार में लगते हैं आठ दिन

Pallawi Kumari, Last updated: Fri, 3rd Sep 2021, 8:22 AM IST
  • 10 सितंबर को गणेश उत्सव का त्योहार बड़े ही धूम धाम से मनाया जाएगा. गणेश चतुर्थी पर लोग मंदिरों से लेकर अपने अपने घर में गणेश प्रतिमा की स्थापना कर उनकी पूजा करते हैं. लेकिन आज आपको बताते हैं कि विश्व की सबसे ऊंची गणेश प्रतिमा कहां है और गणेश चतुर्थी के दिन यहां कैसे पूजा की जाती है.
विश्व के बड़े गणपति.फोटो साभार हिन्दुस्तान टाइम्स

इंदौर- शुक्रवार 10 सितंबर से गणेश चतुर्थी का त्योहार शुरू होने वाला है जो अगले 10 दिनों तक चलेगा. गणेश चतुर्थी के दिन से लेकर पूरे 10 दिनों तक गणेश उत्सव को बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता है. गणेश चतुर्थी के दिन भक्त मंदिर या फिर अपने घरों में श्री गणेश की प्रतिमा की स्थापना करते हैं और पूरे 10 दिनों तक विधि-विधान से पूजा करने के बाद बप्पा की मूर्ति का विसर्जन किया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि विश्व की सबसे ऊंची और विशाल गणेश प्रतिमा कहां है. नहीं, तो चलिए आपको बताते हैं इंदौर के बड़े गणपति के बारे में.

इंदौर में गणेश जी की एक एतिहासिक मंदिर है, जिसे बड़े गणपति के नाम से जाना जाता है. बताया जाता है कि ये मंदिर करीब देढ़ सौ वर्ष पुराना है. इस ऐतिहासि मंदिर में बड़े गणपति के दर्शन के लिए देश -विदेश से लोग आते हैं. इस मंदिर में धुर्वा की माला चढाने की परंपरा है. हालांकि कुछ साल पहले थाइलैड के एक पार्क में 39 मीटर ऊंची गणेश की मूर्ति की स्थापना की गई, जिसे विश्व की सबसे ऊंची गणेश प्रतिमा कहा जाता है, लेकिन ये मूर्ति मंदिर में नहीं है और ना ही प्राचीन है.

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कैसी है बड़े गणपति की विशाल प्रतिमा- लगभग देढ़ सौ साल पुराना इंदौर में स्थित बड़े गणपति की प्रतिमा की ऊंचाई 25 फीट और चौडाई 14 फीट है. मूर्ति को चार फीट की चौकी पर विराजमान किया गया है. बताया जाता है कि मूर्ति के निर्माण में तीन साल लग गए थे. मंदिर में स्थापित इस मूर्तिक को विश्व में सबसे ऊंची गणपति मूर्ति मानी जाती है.

ऐसे हुआ था मूर्ति का निर्माण- बड़े गणपति की मूर्ति को बनाने के लिए नवरत्न, ईंट, बालू, चूना , गुड़, तीर्थों (काशी, अयोध्या, अवंतिका और मथुरा ) की मिट्टी और जल और मैथी के दाने का प्रयोग किया गया था. मूर्ति का ढ़ांचा सोने, चांदी, पीतल, तांबे और लोहे से बनाया गया है.

मंदिर बनाने के लिए उज्जैन के पंडित को आया था सपना- किंवदंतियों के अनुसार, अवंतिका (उज्जैन) के पंडित श्री दाधीच गणेश के भक्त थे. उन्हें रात में भगवान गणेश की मूर्ति का सपना आया.स्वप्न में उनके कहा गया कि वह इंदौर स्थित, स्वंभू गणेश प्रतिमा के पीछे मंदिर बनाए. इसके अगले दिन पंडित दाधीच ने वहां मंदिर बनवाने का निर्णय लिया. फिलहा इस मंदिर की देखरेख पंडित दाधीच की तीसरी पीढ़ी के पंडित धनेश्वर दाधीच कर रहे हैं.

श्रृंगार में लगते हैं आठ दिन- मंदिर की गणेश प्रतिमा इतनी बड़ी है कि श्रृंगार में आठ दिन का समय लग जाता है. गणपति को यहां साल में केवल चार बार चोला चढ़ाया जाता है. एक बार चोला चढ़ाने में 15 दिन का समय लगता है, जिसमें 25 किलों सिंदूर और 15 किलो घी का मिश्रण होता है.

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