इंदौर: मोती हाथी के इलाज के लिए दिया जा रहा म्यूजिक थैरेपी

Smart News Team, Last updated: 11/09/2020 08:04 AM IST
  • इंदौर के चिड़ियाघर में गुस्सैल हाथी मोती का 25 अगस्त से दी जा रही म्यूजिक थेरेपी रास आ रही है. म्यूजिक सिस्टम से मोती को बिस्मिल्ला खान की शहनाई, पं. हरिप्रसाद चौरसिया की बांसुरी के साथ ही संतूरवादन सुनाया जा रहा है.
प्रतीकात्मक तस्वीर 

इंदौर के चिड़ियाघर में गुस्सैल हाथी मोती के इलाज हेतु एक अनूठी कवायद शुरू की गई है. मोती को 25 अगस्त से म्यूजिक थेरेपी दी जा रही है. सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह थैरेपी उसे रास आ रही है. उसके बाड़े में लगाए गए म्यूजिक सिस्टम से मोती को हर दिन दोपहर में तीन से चार घंटे तक बिस्मिल्ला खान की शहनाई, पं. हरिप्रसाद चौरसिया की बांसुरी के साथ ही संतूरवादन सुनाया जा रहा है. इससे उसका गुस्सा शांत होने लगा है. चिड़ियाघर प्रबंधन की मानें तो अब उसका चिड़चिड़ापन कम हो गया है और उसने बेवजह चिंघाड़ना भी बंद कर दिया है. जिसके बाद यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह थैरेपी मोती हाथी को रास आ रहा है.

बताया जा रहा है कि थेरेपी शुरू करने के दो दिन पहले गुस्साए मोती ने अपने बाड़े की दीवार तोड़ दी थी और जोर-जोर से चिंघाड़ने लगा था. उसे नियंत्रित करने में चिड़ियाघर कर्मचारियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी. इसके बाद चिड़ियाघर प्रबंधन ने उसे शांत रखने के लिए म्यूजिक थैरेपी देने का निर्णय लिया और यहां म्यूजिक सिस्टम लगवा दिया गया है. इसके साथ ही बाड़े में जेसीबी, ट्रैक्टर, ट्रक और बसों के टायरों को रखवाया जिससे मोती इनसे खेलने में व्यस्त रहे. उसके गुस्से में कमी आने का यह भी एक प्रमुख कारण माना जा रहा है.

कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय के प्रभारी उत्तम यादव का कहना है कि मोती के गुस्से को शांत करने के लिए कई प्रयोग किए जा रहे हैं. इसके तहत उसके बाड़े में म्यूजिक सिस्टम लगाया गया और कुछ अन्य प्रयोग किए गए हैं. इस प्रयोग का सकारात्मक प्रभाव दिखने लगा है. पिछले दिनों में उसका उग्र स्वरूप नजर नहीं आया, लेकिन सावधानी बनाए रखना आवश्यक है. पशु चिकित्सक उसका उपचार भी कर रहे हैं. जिससे कि उसे जल्दी से ठीक किया जा सके.

चिड़ियाघर के प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार मोती बचपन से ही इंदौर चिड़ियाघर में है. उसे लंबे समय तक जंजीरों से बांधकर रखा गया था. मोती की देखभाल चिड़ियाघर प्रबंधन के लिए हमेशा से चुनौतीभरा रहा है. इस साल भी दो बार गुस्से में आकर 7 जनवरी और 23 अगस्त को भी बाड़े को तहस-नहस कर चुका है. इलाह जरूर किया जा रहा है लेकिन भय भी बना हुआ है.

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कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय के प्रभारी यादव ने बताया कि हाथियों में उम्र के साथ गुस्सा बढ़ता है. मोती चिड़ियाघर में पिछले 40 साल से है. वह वर्षों से दर्शकों का चहेता रहा है. 14 दिसंबर 2019 को उसने गुस्से में आकर लक्ष्मी नामक हथिनी पर हमला कर दिया था. उसे इतनी जोर से टक्कर मारी थी कि उसकी किडनी क्षतिग्रस्त हो गई थी. दस दिन चले उपचार के बाद 24 दिसंबर 2019 को उसकी मौत हो गई थी. इस कारण भी मोती हाथी का देखभाल अत्यंत आवश्यक है.

 

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