इंदौर में नकली रेमडेसिविर बेचने वाले गिरोह के खिलाफ पुलिस का सख्त एक्शन

Smart News Team, Last updated: Mon, 10th May 2021, 8:39 PM IST
  • आपदा में गैरकानूनी अवसर तलाशने वाले नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन बेचने वाले गिरोह के सरगना सुनील मिश्रा से गुजरात पुलिस की पूछताछ के बाद इंदौर पुलिस ने कई बड़े खुलासे किए है। पुलिस के आला अधिकारियों ने लोगो की जान से खिलवाड़ करने वाले बदमाशो पर नकेल कसने के लिए सख्त कदम भी उठाना शुरू कर दिया है।
प्रतिकात्मक तस्वीर

इंदौर .  पुलिस के खुलासे में सामने आया है कि एक महीने में गुजरात से 1200 नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन मध्यप्रदेश के इंदौर, जबलपुर और देवास में लाए गए थे। गिरोह के सदस्य सोशल मीडिया पर मदद के बहाने लोगो से संपर्क करते थे और फिर उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर 35 से 40 हजार रुपये में इंजेक्शन बेच देते थे। पुलिस पड़ताल में कई और बाते भी सामने आई है जिसमे पता चला है गुजरात मे नमक और ग्लूकोज के पानी से इंजेक्शन बनाये जाते थे।

महामारी के दौर में भी लोगों की जान से खिलवाड़ जारी है। इंदौर पुलिस ने खुलासा किया है कि बीते एक माह में पड़ोसी राज्य गुजरात से कम से कम 1,200 नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन मप्र में लाकर बेचे गए। ये इंजेक्शन नमक और ग्लूकोज के पानी से बनाए गए थे। इंजेक्शन की खेप बकायदा गुजरात से इंदौर लाई जाती थी और फिर सुनील मिश्रा नामक आरोपी अपने साथियों के साथ उन्हें बेचने का काम करता था। गुजरात में गिरफ्त में आये आरोपियों ने पुलिस के सामने कबूल किया है कि कौशल वोरा नामक आरोपी पहले गुजरात से 700 नकली इंजेक्शन लाया था और उसके बाद सुनील मिश्रा गुजरात गया और फिर 500 नकली इंजेक्शन ले आया। कुल 1200 इंजेक्शन में 200 देवास और 500 इंजेक्शन जबलपुर पहुंचाये गए थे। इंदौर की विजयनगर पुलिस ने सबसे पहले इस मामले को लेकर कार्रवाई शुरू की थी और अब गुजरात में गिरफ्तार आरोपियों को कानूनी तरीके से इंदौर लाकर पूछताछ की जाएगी जिसके बाद और भी कई बड़े खुलासे हो सकते है।

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नकली रेमडेसिविर और कालाबाजारी करने वाले कुल 21 आरोपियों पर इंदौर पुलिस ने शिकंजा कसते हुए उन्हें गिरफ्तार किया है। वही इस मामले को लेकर इंदौर आईजी हरिनारायणचारि मिश्र ने बताया कि नकली इंजेक्शन मामले में आरोप पर गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया जाएगा वही कालाबाजारी कर लोगो को ऊंचे दामो पर रेमडेसिविर इंजेक्शन बेचने वाले सभी आरोपियों की संपत्ति की जांच की जाएगी इसके अलावा उनके अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया जाएगा। आईजी हरिनारायणचारि मिश्रा ने साफ किया कि इस पूरे सिंडिकेट से जुड़े तारो की जांच के लिए एसआईटी गठित कर जांच की जा रही है।

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