इंदौर की संस्कृति का बेमिसाल नमूना है ‘लालबाग पैलेस’, इसकी सादगी है बेहद आकर्षक

Smart News Team, Last updated: Tue, 6th Jul 2021, 12:46 AM IST
  • इंदौर का लालबाग पैलेस, जो बाहर से देखने में तो बिल्कुल साधारण सा लगता है, लेकिन पैलेस का अंदरूनी भाग काफी खूबसूरत बना हुआ है. कहा जाता है कि महल की सजावट ही पर्यटकों को अपनी ओर सबसे ज्यादा आकर्षित करती है.
इंदौर का लालबाग पैलेस बाहर से देखने में तो बिल्कुल साधारण सा लगता है, लेकिन पैलेस का अंदरूनी भाग काफी खूबसूरत बना हुआ है. (Credit: World Monument Fund Lal Bagh)

इंदौर शहर ने अपनी संस्कृति और अपने इतिहास को बड़े ही शानदार अंदाज से संजोया हुआ है. यहां के खानपान से लेकर यहां की इमारतों तक में इंदौर की संस्कृति झलकती है. यहां ऐसी कई इमारतें हैं जो देखने में तो आकर्षक लगती ही हैं, साथ ही अपने ऐतिहासिक तथ्यों के लिए बी खूब जानी जाती हैं. इन्हीं इमारतों में शामिल है इंदौर का लालबाग पैलेस, जो बाहर से देखने में तो बिल्कुल साधारण सा लगता है, लेकिन पैलेस का अंदरूनी भाग काफी खूबसूरत बना हुआ है. कहा जाता है कि महल की सजावट ही पर्यटकों को अपनी ओर सबसे ज्यादा आकर्षित करती है.

इंदौर का लाल बाग पैलेस खान नदी के तट पर 28 एकड़ में फैला हुआ है. इसका निर्माण महाराजा शिवाजी राव होलकर ने करवाया था. इस महल का इस्तेमाल होलकर शाही परिवार के द्वारा मेजबानी में किया जाता था. महल अपनी अनूठी वास्तुकला के लिए खूब जाना जाता है. कहा जाता है कि महल में भारत का सबसे सुंदर गुलाबों का बगीचा भी बना हुआ है, जो लालबाग पैलेस की खूबसूरती में चार चांद लगाता है.

इंदौर का लाल बाग पैलेस खान नदी के तट पर 28 एकड़ में फैला हुआ है. इसका निर्माण महाराजा शिवाजी राव होलकर ने करवाया था. (Credit: World Monument Fund Lal Bagh)

महल की सबसे खास बात यह है कि इसका प्रवेश द्वार इंग्लैंड के बकिंघम पैलेस के गेट की हूबहू प्रतिकृति है, जिसे जहाज के रास्ते मुंबई लाया गया था और वहां से इसे सड़क मार्ग द्वारा इंदौर पहुंचाया गया था. कहा जाता है कि पैलेस के गेट की मरम्मत पूरे देश में कहीं नहीं हो सकती है. अगर इसकी मरम्मत करवानी भी है तो इसे इंग्लैंड ही लेकर जाना पड़ेगा. इससे इतर महल के बॉलरूम का लकड़ी का फ्लोर स्प्रिंग का बना है जो कि उछलता रहता है. वहीं महल की रसोईं से नदी का किनारा दिखाई देता है जो कि काफी खूबसूरत लगता है. बताया जाता है कि रसोईं से एक रास्ता भूमिगत सुरंग में भी खुलता है.

महल की सबसे खास बात यह है कि इसका प्रवेश द्वार इंग्लैंड के बकिंघम पैलेस के गेट की हूबहू प्रतिकृति है, जिसे जहाज के रास्ते मुंबई लाया गया था और वहां से इसे सड़क मार्ग द्वारा इंदौर पहुंचाया गया था. (Credit: World Monument Fund Lal Bagh)

इसके अलावा महल के कमरों की बनावट भी लोगों को खूब आकर्षित करती है. कमरे में बेल्जियम के कांच से कारीगरी की गई है. इसके अलावा यहां पर्शियन कालीन, महंगे और खूबसूरत झाड़ फानूस और इटालियन संगरमरम का इस्तेमाल किया गया है. इंदौर का यह लालबाग पैलेस अपने आप में यहां का स्वर्णिम इतिहास समेटे हुए है. हालांकि पर्यटकों को महल के अंदर फोटो लेना बिल्कुल बना है.

यहां पर्शियन कालीन, महंगे और खूबसूरत झाड़ फानूस और इटालियन संगरमरम का इस्तेमाल किया गया है. (Credit: World Monument Fund Lal Bagh)

पर्यटकों के लिए महल सोमवार को छोड़कर हफ्ते के बाकी छह दिन सुबह 10 बजे से शाम के पांच बजे तक खुला रहता है. इसमें एंट्री करने के लिए पर्यटकों को 10 रुपये है. हालांकि महल के अंदर किसी भी तरह का मोबाइल या कैमरा ले जाने की अनुमति नहीं है.

कैसे पहुंचें: लाल बाग पैलेस इंदौर के रेलवे स्टेशन और बस अड्डे से मात्र चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. ऐसे में यहां रिक्शा या टैक्सी करके आसानी से पहुंचा जा सकता है. हालांकि महल तक पहुंचने का सबसे अच्छा वाहन रिक्शा ही माना जाता है, जो कि सस्ता होने के साथ-साथ सुविधाजनक भी होता है. वहीं देवी अहिल्याबाई होलकर एयरपोर्ट से लालबाग पैलेस की दूरी मात्र 7 किलोमीटर है, ऐसे में टैक्सी करके यहां तक आसानी से पहुंचा जा सकता है.

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