Lohri 2022: लोहड़ी पर क्यों जलाई जाती है पवित्र अग्नि, जानें अलाव जलाने की वजह और महत्व

Pallawi Kumari, Last updated: Thu, 13th Jan 2022, 10:04 AM IST
  • लोहड़ी का त्योहार पारंपरिक मान्यताओं और रीति-रिवाज से जुड़ा है. इस दिन घर आसपास खुली जगह या चौराहे पर अलाव जलाई जाती है. इस पवित्र अग्नि के इर्द-गिर्द लोग फेरे लेते हैं और भांगड़ा गिद्दा करते हैं. आइये जानते हैं कि लोहड़ी पर क्यों जलाई जाती है अग्नि और क्या है इसका महत्व.
लोहड़ी पर अलाव जलाने का महत्व

आज गुरुवार 13 जनवरी को धूमधाम के साथ लोहड़ी का त्योहार मनाया जाता है. नए साल 2022 में लोहड़ी पहला त्योहार होता है, जिसे खासकर पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश सहिच उत्तर भारत के राज्यों में मनाया जाता है. लेकिन आजकल पूरे भारत में लोहड़ी पर्व बड़े ही हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाने लगा है. लोहड़ी की पर्व पारंपरिक तौर से फसल और खेती से जुड़ा हुआ है. इस दिन किसान अपने फसल की पहली कटाई लोहड़ी की पवित्र अग्नि डालते हैं और उपासना करते हैं. 

वैसे तो लोहड़ी को लेकर कई परंपराएं और रीति-रिवाज है. लेकिन जो चीज सबसे जरूरी है वो है अग्नि. अग्नि चलाए बिना लोहड़ी का त्योहार संपन्न नहीं हो सकता है. अलाव जलाकर ही लोहड़ी का त्योहार मनाया जाता है. अग्नि को शुभ माना जाता है. इसलिए लोहड़ी का त्योहार भी पवित्र अग्नि के बीच मनाया जाता है.  लोहड़ी पर अग्नि जलाने के पीछे एक पौराणिक कथा है.

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लोहड़ी पर अग्नि जलाने का महत्व- 

लोहड़ी में जलाई गई पवित्र अग्नि में नए फसलों को समर्पित किया जाता है. अग्नि में तिल, गुड़, मूंगफली, रेवड़ियां और गजक आदि समर्पित किए जाते हैं. मान्यता है कि ऐसा करने से ईश्वर की कृपा से कृषि में उन्नति आती है और फसल लहलहाते हैं.

लोहड़ी पर अग्नि जलाने की पौराणिक कथा-

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार राजा दक्ष ने यज्ञ करवाया और इसमें अपने दामाद शिव और पुत्री सती को आमंत्रित नहीं किया. क्योंकि सती ने पिता के विरुद्ध होकर शिव से शादी की थी. पिता का आमंत्रण ना मिलने पर निराश होकर सती अपने पिता के पास जवाब लेने गई कि उन्होंने शिव जी को यज्ञ में निमंत्रण क्यों नहीं भेजा. यज्ञ में उपस्थित लोगों के सामने राजा दक्ष ने सती और भगवान शिव की बहुत निंदा की. 

इससे सती बहुत दुखी हुई और रोने लगी. उससे अपने पति का अपमान नहीं देखा गया और सती ने उसी यज्ञ में खुद को भस्म कर दिया. सती के मृत्यु का सूचना सुन खुद भगवान शिव ने वीरभद्र को उत्पन्न कर उसके द्वारा यज्ञ का विध्वंस करा दिया. इसलिए लोहड़ी की शाम में लकड़ियां जलाई जाती हैं. इसे सती के त्याग के रूप में हर साल याद करके मनाया जाता हैं. 

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