मकर संक्रांति पर क्यों उड़ाई जाती है पतंग, भगवान राम से जुड़ी है पतंगोत्सव की परंपरा

Smart News Team, Last updated: Fri, 7th Jan 2022, 8:57 AM IST
  •  देश के कई हिस्सों में मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाई जाती है. गुजरात में तो ये दिन पतंगोत्व से लिए मशहूर है. लेकिन क्या आप जानते हैं आखिर मकर संक्रांति के दिन पतंग क्यों उड़ाई जाती है और कैसे शुरू हुई ये परंपरा.
मकर संक्रांति

14 जनवरी को देशभर में हर साल मकर संकांति का त्योहार मनाया जाता है. मकर संक्रांति हिंदूओं का खास और बड़ा पर्व माना जाता है. पौष माह का आखिरी और नए साल का पहला पर्व मकर संक्रांति पर स्नान-दान का खास महत्व होता है. लेकिन इस दिन देश के कई हिस्सों में पतंग उड़ाई जाती है और इसे पतंगोत्सव के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन आसमान में आपको रंग-बिरंगी पतंगे उडती दिेखेगी. सभी स्नान और पूजा पाठ करने के बाद इस दिन तिल के लड्डू या तिल से बनी चीजें खाते हैं इसके बाद छतों पर पंतग उड़ाए जाते हैं. आइये जानते हैं आखिर मकर संक्रांति के दिन क्यों उड़ाई जाती है पतंग.

भगवान राम से जुड़ी है मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की परंपरा

कहा जाता है कि मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की परंपरा भगवान श्री राम के समय में शुरू हुई थी. तमिल की तन्दनानरामायण के मुताबिक, मकर संक्रांति के दिन ही भगवान राम ने भी पतंग उड़ाई थी और वो पतंग इन्द्रलोक में चली गई थी. भगवान राम से शुरू की गई इस परंपरा को आज भी निभाया जाता है.

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मकर संक्रांति के दिन कई शहरों में पतंगोत्सव के लिए प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती है, जिसे देखने दूर-दूर से लोग आते हैं. गुजरात, जयपुर और पंजाब जैसे राज्यों में पतंगोत्वस बड़े ही धूम धाम के साथ मनाया जाता है. मकर संक्रांति के अलावा पोंगल और स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भी पतंग उड़ाए जाते हैं.

कब है मकर संक्रांति-

शुक्रवार 14 जनवरी 2022 को मकर संक्राति है. इस दिन शुभ मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 09 मिनट से दोपहर 12 बजकर 51 मिनट तक रहेगा. मकर संक्रांति के दिन दोपहर 01 बजकर 36 मिनट तक शुक्ल योग है, उसके बाद से ब्रह्म योग लग जाएगा.

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