इंदौर में प्रोसेसिंग प्लांट लगाने की तैयारी, नगर निगम में कवायद शुरू

Smart News Team, Last updated: 19/09/2020 02:44 PM IST
  • इंदौर. बड़े ई-वेस्ट जैसे खराब वॉशिंग मशीन, लैपटॉप, कम्प्यूटर, रेडियो, टीवी, टेप रिकॉर्डर आदि की कीमतें तय कर उन्हें नागरिकों से खरीदा जाएगा.
प्रतीकात्मक तस्वीर 

इंदौर। इंदौर में ई-वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट लगाने की कवायद नगर निगम ने शुरू कर दी है. यह प्लांट ) निजी-जनभागीदारी यानी पीपीपी मॉडल पर लगाने की तैयारी है. इसके लिए जमीन से लेकर स्थापना तक का पूरा खर्च संबंधित कंपनी को उठाना होगा. निगम शहरभर से ई-वेस्ट संग्रहण करने में उसे मदद करेगा. मार्च-2021 तक प्लांट स्थापित करने का लक्ष्य है.

निगमायुक्त प्रतिभा पाल के निर्देश पर निगम ने कंपनियों की तलाश शुरू कर दी है. दो-तीन कंपनियां प्रोजेक्ट में काम करने की इच्छुक हैं. जो कंपनी प्लांट लगाने का ठेका लेगी, उसे पहले शहर से रोजाना निकलने वाले ई-वेस्ट की मात्रा का अध्ययन करना होगा, जिसके आधार पर वह प्लांट की क्षमता तय करेगी. जो कंपनी इस मामले में निगम को जितनी प्रीमियम देने का ऑफर देगी, उसे ठेका दिया जाएगा

वही ई-वेस्ट के जानकारों ने बताया कि शहर से ई-वेस्ट दो तरह से इकट्ठा किया जाएगा. मोबाइल कवर, टूटे मोबाइल फोन, मोबाइल बैटरी, खराब चार्जर, की-बोर्ड, ईयर फोन, इलेक्ट्रॉनिक खिलौने जैसे छोटे-छोटे ई-वेस्ट घरों से लेने के लिए निगम के डोर टू डोर कचरा संग्रहण वाहनों में अतिरिक्त बिन लगाया जाएगा.

बड़े ई-वेस्ट जैसे खराब वॉशिंग मशीन, लैपटॉप, कम्प्यूटर, रेडियो, टीवी, टेप रिकॉर्डर आदि की कीमतें तय कर उन्हें नागरिकों से खरीदा जाएगा. कंपनी हर जोन पर अपना व्यक्ति नियुक्त करेगी. टोल फ्री नंबर के जरिये नागरिक ई-वेस्ट बेचने के लिए संपर्क कर सकेंगे.कंपनी की गाड़ी उसके घर आकर ये सामान उठा ले जाएगी.

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निगम के सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट असद वारसी कि माने तो इंदौर से सालाना 5 से 6 हजार टन ई-वेस्ट निकलता है. अभी तक शहर में इसके निपटान के लिए अलग से कोई प्रोसेसिंग प्लांट नहीं है.निगम इसीलिए इस मामले में भी कदम बढ़ा रहा है। डोर टू डोर कचरा कलेक्शन गाड़ियों में ई-वेस्ट के लिए अतिरिक्त बिन लगेगा, जिसका रंग तय नहीं है.

 

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