नहीं रहे राहत इंदौरी, 19 साल की उम्र में सुनाई थी पहली शायरी

Smart News Team, Last updated: 11/08/2020 08:03 PM IST
  • डॉ.राहत इंदौरी एक ऐसा नाम है जिसने पूरी दुनिया में अपने शब्दों की जादूगरी से हर किसी को वाह करने पर मजबूर कर दिया. राहत इंदौरी का शुरूआती नाम कामिल था जो आगे चल कर राहत इंदौरी के नाम प्रसिद्ध हो गया. अब जब राहत इंदौरी साहब हमारे बीच नहीं रहे. आइए एक नज़र डालते हैं उनकी जिंदगी पर...
डॉ.राहत इंदौरी

राहत इंदौरी का जन्म 1 जनवरी 1950 को हुआ था. उनके पिता का नाम रिफअत उल्लाह था. राहत साहब के पिता की शादी 1940-41 में देवास में हुई. उनका निकाह मकबूल बी के साथ हुआ. शादी के दो साल बाद बेटी तहजीबुन्निसा पैदा हुई. इसके बाद दूसरी बेटी तरकीबुन्निसा का जन्म हुआ. इसके बाद आकिल का जन्म हुआ और फिर कामिल और आदिल की पैदाइश हुई.

आपको बता दें कि कामिल ही बाद में राहत इंदौरी के नाम से जाने गए. कामिल यानी राहत इंंदौरी साहब ने महज 19 साल की उम्र में कॉलेज के दिनों में पहली बार शायरी पढ़ी थी. इतना ही नहीं राहत इंदौरी फुटबॉल और हॉकी से भी खासे लगाव रखते थे. वो कॉलेज के दिनों में दोनों ही टीमों के कप्तान भी रहे थे. राहत की प्रारंभिक शिक्षा नूतन स्कूल इंदौर में हुई.

 उन्होंने इस्लामिया करीमिया कॉलेज इंदौर से 1973 में अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी की और 1975 में बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय भोपाल से उर्दू साहित्य में एमए किया. इसके बाद 1985 में मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय से उर्दू साहित्य में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की.

 राहत इंदौरी जी ने शुरुआती दौर में इंद्रकुमार कॉलेज, इंदौर में उर्दू साहित्य का अध्यापन कार्य शुरू कर दिया. उनके छात्रों के मुताबिक वह कॉलेज के अच्छे व्याख्याता थे. फिर बीच में वो मुशायरों में व्यस्त हो गए और पूरे भारत व विदेशों से निमंत्रण प्राप्त करना शुरू कर दिया. उनमें अनमोल क्षमता, कड़ी लगन और शब्दों की कला की एक विशिष्ट शैली थी, जिसने बहुत जल्द से जनता के बीच लोकप्रिय बना दिया.

 राहत इंदौरी ने बहुत जल्द ही लोगों के दिलों में अपने लिए एक खास जगह बना लिया और तीन से चार साल के भीतर ही उनकी कविता की खुशबू ने उन्हें उर्दू साहित्य की दुनियां में एक प्रसिद्ध शायर बना दिया था.

आज का अखबार नहीं पढ़ पाए हैं।हिन्दुस्तान का ePaper पढ़ें |

अन्य खबरें