डाक्टर जीएस मित्तल की मौत पर बेटे का आरोप, अस्पताल प्रबंधन ने नहीं किया सही इलाज

Smart News Team, Last updated: 14/09/2020 11:04 PM IST
  • इंदौर के डाक्टर जीएस मित्तल की मौत के मामले में बेटे प्रतीक मित्तल ने ग्रेटर कैलाश अस्पताल प्रबंधन पर इलाज नहीं करने का आरोप लगाया है. उन्होंने बताया कि समय पर इलाज नहीं मिलने से उनकी मौत हुई है.
ग्रेटर कैलाश अस्पताल

इंदौर| इंदौर में डॉ. जीएस मित्तल की मौत को लेकर उनके बेटे प्रतीक मित्तल ने ग्रेटर कैलाश अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया है. सोमवार को उन्होंने पलासिया थाने में शिकायत करते हुए कहा कि अस्पताल प्रबंधन ने समय पर उनका इलाज नहीं किया जिस करण उनकी मौत हो गई. पिता को हम जीवित अवस्था में लेकर आए थे. वे दर्द से तड़प रहे थे, लेकिन ड्यूटी डॉक्टर और स्टाफ ने बेड नहीं होने की बात कहते हुए कहीं और लेकर जाने को कह दिया. यहाँ तक कि उन्होंने उन्हें हाथ लगाकर देखा भी नहीं. शिकायत के बाद पुलिस ने मामले की छानबीन कर रही है.

इंदौर के बख्तावर राम नगर निवासी एमवायएच में सीएमओ रहे डॉ. जीएस मित्तल का 8 सितंबर को अचानक निधन हो गया था. वह स्कूटर चला रहे थे तभी उन्हें हार्ट अटैक आया, इलाज के दौरान उनका निधन हो गया. डॉ. मित्तल एक ऑपरेशन में कैंसर सर्जन डॉ. अरुण अग्रवाल को असिस्ट करने के लिए स्कूटर से गोकुलदास अस्पताल जा रहे थे, तभी साकेत चौराहे पर अचानक स्कूटर से गिर गए। वहां मौजूद लोगों ने उनकी जेब से मोबाइल निकाला और आखिर में डायल नंबर लगाया। बेटे को फोन पर जानकारी मिलते ही बख्तावर रामनगर से मौके पर पहुँच उन्हें अस्पताल लेकर गए.

बेटे प्रतीक मित्तल ने बताया कि 8 सितंबर को दोपहर करीब 2 बजे पिता के बीमार होने पर मैं अपने भाई गौरव बंसल और अन्य राहगीरों के साथ उन्हें पास स्थित ग्रेटर कैलाश अस्पताल लेकर पहुंचा था. उस समय पिता दर्द से कराह रहे थे. उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही थी. स्ट्रेचर पर उनको इमरजेंसी रूम में ले गए. लेकिन वहां पर ड्यूटी डॉक्टर और दो महिला स्टाफ ने कहा कि बेड खाली नहीं है. ड्यूटी डॉक्टर को बार-बार शिकायत की लेकिन उन्होंने बिना हाथ लगाए ही दूसरे अस्पताल ले जाने की बात कह दी.

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इसी दौरान मेरे पिता के दोस्त डॉक्टर अरुण अग्रवाल अस्पताल पहुंचे और पिता के बारे में जानकारी ली तो डॉ. बंडी ने बताया कि उन्हें मृत हालत में अस्पताल लाए थे. इस पर उन्होंने बहस करते हुए कहा कि वे तो गंभीर हालत में आए थे, जबकि आपके स्टाफ ने तो कोशिश न करते हुए कहीं और लेकर जाने को कहा. इस पर डॉक्टर अग्रवाल ने कहा कि बॉडी हैंडओवर करने का लेटर तो दो, इस पर वे बोले कि डेथ सर्टिफिकेट चाहिए तो बॉडी एमवाय अस्पताल लेकर जाओ. इस पर हम बॉडी को एमवाय लेकर पहुंचे. जहां उनका पोस्टमार्टम किया गया.

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