CM गहलोत सरकार का बड़ा फैसला, राजस्थान दिवस 1200 कैदियों की होगी रिहाई

Smart News Team, Last updated: Mon, 29th Mar 2021, 6:39 PM IST
  • राजस्थान दिवस के उपलक्ष में सरकार 30 मार्च के दिन गहलोत सरकार करीब 1200 कैदियों को समय से पहले रिहा करेगी. शनिवार को मुख्यमंत्री निवास पर हुई जेल विभाग की बैठक में यह महत्वपूर्ण और संवेदनशील निर्णय लिया गया है.
Rajasthan chief minister Ashok Gehlot. (HT Photo)

जयपुर: राजस्थान की CM गहलोत की सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है. राजस्थान दिवस के उपलक्ष में सरकार 30 मार्च के दिन गहलोत सरकार करीब 1200 कैदियों को समय से पहले रिहा करेगी. शनिवार को मुख्यमंत्री निवास पर हुई जेल विभाग की बैठक में यह महत्वपूर्ण और संवेदनशील निर्णय लिया गया है. शांतिपूर्वक अपनी सजा का अधिकांश हिस्सा भुगत चुके या गंभीर बीमारियों से ग्रसित और वृद्ध बंदियों को रिहा किया जाएगा.

CM अशोक गहलोत ने कहा कि बूढ़े और गंभीर बीमारियों से ग्रसित कैदियों को इसलिए रिहा किया जा रहा है ताकि वे कोविड-19 संक्रमण के खतरे से बचे रहें. बूढ़े पुरुष कैदी जिनकी आयु 70 वर्ष और बूढ़ी महिला कैदी जिनकी आयु 65 वर्ष या इससे ज्यादा हो चुकी है, और जो सजा का एक तिहाई भाग काट चूके हैं. उन्हें समय से पूर्व रिहाई मिलेगी.

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गहलोत सरकार के फैसले से मिलेगी कई परिवारों को खुशियां

सीएम गहलोत के इस बड़े और संवेदनशील निर्णय से कई परिवारों को खुशियां मिलेगी. रिहाई पाने वाले कैदियों में ऐसे कैदियों की संख्या सबसे ज्यादा है जो आजीवन कारावास से दंडित हैं और 14 वर्ष की सजा भुगत चुके हैं. उन बंदियों का नाम है जो कैंसर, एड्स , कुष्ठ और अन्य गंभीर रोगों से ग्रसित है अथवा दृष्टिहीन हैं. अपने दैनिक क्रियाकलापों के लिए भी दूसरों पर निर्भर हैं, उन्हें रिहा किया जायेगा. जेल महानिदेशक राजीव दासोत के मुताबिक ऐसे बंदियों को वर्तमान में स्थाई पैरोल पर होने की स्थिति में ही रिहा किया जा सकेगा.

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गंभीर अपराधों में लिप्त रहे कैदियों को नहीं मिलेगी राहत

जघन्य अपराधों में लिप्त रहे 28 विभिन्न श्रेणियों के कैदियों को मुख्यमंत्री के इस फैसले के तहत कोई राहत नहीं मिलेगी. बलात्कार, ऑनर किलिंग, मॉब लिंचिंग, पॉक्सो एक्ट, तेजाब हमले से संबंधित अपराध, आर्म्स एक्ट, राष्ट्रीय सुरक्षा कानून, एनडीपीएस एक्ट, आबकारी अधिनियम, पीसीपीएनडीटी एक्ट, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, गौवंश अधिनियम, आवश्यक वस्तु अधिनियम, सीमा शुल्क अधिनियम आदि के तहत सजा भुगत रहे बंदियों को रिहा नहीं किया जाएगा.

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