वसुंधरा के लव जिहाद बिल से फंसे गहलोत, 12 साल से राष्ट्रपति के पास मंजूरी लंबित

Smart News Team, Last updated: Wed, 25th Nov 2020, 8:17 PM IST
  • बीजेपी शासित राज्यों में शादी के बाद धर्म परिवर्तन यानी लव जिहाद विरोधी कानूनों के बनने का राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत के विरोध के बाद बीजेपी ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मांग की है कि वो वसुंधरा राजे सरकार के कार्यकाल में पास राजस्थान धर्म स्वातंत्राय बिल 2008 को मंजूरी प्रदान करके कानून बना दें.
वसुंधरा सरकार में पास लव जिहाद कानून 12 साल से राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए लंबित है.

जयपुर. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत यूपी, एमपी समेत कई बीजेपी शासित राज्यों में शादी के बाद जबरन धर्म परिवर्तन यानी लव जिहाद के खिलाफ बन रहे कानूनाों का भले विरोध किया हो लेकिन विपक्षी भाजपा को गहलोत को तनाव देने का हथियार मिल गया है. बीजेपी ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मांग की है कि वसुंधरा राजे सरकार के दौरान राजस्थान विधानसभा से पास राजस्थान धर्म स्वातंत्राय बिल 2008 को वो मंजूरी दे दें जो 12 साल से राष्ट्रपति भवन में लंबित है. बीजेपी सरकार का ये विधेयक मोटा-मोटी लव जिहाद कानून जैसा ही है.

उत्तर प्रदेश में बीजेपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने मंगलवार को लव जिहाद रोकने के लिए बने कानून को अध्यादेश के जरिए लागू कर दिया है. मध्य प्रदेश, हरियाणा समेत दूसरे बीजेपी शासित राज्य भी इस तरह के कानून को लाने की प्रक्रिया में जुटे हुए हैं. इसी दौरान गहलोत ने कहा था कि कोर्ट में यह कानून टिक नहीं पाएगा क्योंकि दो व्यस्क लोगों की शादी में इस तरह की दखलअंदाजी की कोशिश न्यायालय में पास नहीं हो पाएगा. गहलोत ने कहा था कि लव जिहाद बीजेपी का गढ़ा शब्द है जिसके जरिए वो लोगों को बांटने की कोशिश कर रही है. 

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राजस्थान के एक वरिष्ठ बीजेपी नेता ने नाम ना छापने की शर्त पर कहा कि राजे सरकार में यह बिल पहले 2006 में पास हुआ था जिसमें राज्यपाल ने कुछ बदलाव करने का सुझाव दिया था. 2008 में बदले हुए विधेयक को पास करके राज्यपाल के पास भेजा गया जिसे राजभवन ने राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए राष्ट्रपति भवन भेज दिया था. उस पर राष्ट्रपति की मंजूरी नहीं मिली है. 

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विधेयक में लव जिहाद का आरोप साबित होने पर 5 साल की सजा और 50 हजार रुपए के जुर्माने का प्रावधान है. नाबालिग लड़की, एससी, एसटी के केस में ये सजा और ज्यादा है. विपक्ष के नेता गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि विधानसभा ने दो बार इस बिल को पास किया है और ये राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार कर रहा है. कटारिया ने कहा कि हम राष्ट्रपति को लिखेंगे और आग्रह करेंगे कि वो इस विधेयक को मंजूरी दें. 

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राज्य के संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल ने बीजेपी से सवाल किया कि 2018 तक राज्य और केंद्र दोनों जगह बीजेपी सरकार चला रही थी तब उसने क्या किया. कांग्रेस के चीफ व्हिप महेश जोशी ने कहा कि अगर राष्ट्रपति उस 12 साल पुराने बिल को मंजूरी देते हैं तो हमारी सरकार उसे अपनी नीति के मुताबिक देखेगी.  

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