CM गहलोत ने Modi Government को बताया छापे वाली सरकार, राठौड़ ने दिया जवाब

Smart News Team, Last updated: Mon, 3rd Jan 2022, 11:03 PM IST
  • मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की केंद्र की सरकार को छापे की सरकार कहा. इसके साथ ही सीएम गहलोत ने मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक के दावे पर प्रतिक्रिया दी.
CM गहलोत ने Modi Government को बताया छापे वाली सरकार, राठौड़ ने दिया जवाब (File photo)

जयपुर. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को छापे वाली सरकार कहा. सीएम अशोक गहलोत ने सोमवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र कि एनडीए सरकार में छापे (आयकर) करने कि प्रवित्ति है. मेरे भाई के घर पर ऐसे छापे मारे गए थे. जब महाराष्ट्र में अजीत पंवार के आवास पर छापेमारी की गई, तो उनकी बहन के घर भी छापेमारी की गई, जो दो कमरों के फ्लैट में रहती है.

सीएम गहलोत ने मेघालय के राज्यपाल सत्य पाल मलिक के दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “मुझे नहीं लगता कि अमित शाह पीएम के लिए ऐसी भाषा का इस्तेमाल कर सकते हैं. आज देश पर दो ही लोग राज कर रहे हैं. सिर्फ दो चेहरे हैं- मोदी और अमित शाह. अगर उन्होंने इस तरह के शब्द बोले हैं, तो यह एक तरह की समझ है.

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सीएम गहलोत ने कहा कि भाजपा सरकार एजेंसियों का दुरुपयोग करती है और धमकी देने के लिए छापेमारी करती है. इसके साथ ही उन्होंने आगे कहा कि क्या सुप्रीम कोर्ट को पेगासस और चुनावी बांड जैसे मुद्दों में प्राथमिकताएं तय नहीं करनी चाहिए? लगभग 98% फंडिंग बीजेपी को जा रही है और बाकी देश के अन्य सभी राजनीतिक दलों को जा रही है. राजनीतिक दल बर्बाद हो रहे हैं.

सीएम गहलोत इतने पर ही नहीं रुके. उन्होंने केंद्र सरकार पर राज्यों को आर्थिक रूप से कमजोर करने का आरोप लगाया. सीएम गहलोत ने कहा कि राज्य को मजबूत करने के लिए केंद्र को अपनी नीति बदलने की जरूरत है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि कोविड महामारी और केंद्र की गलत नीतियों के कारण राज्यों का राजस्व संग्रह कम हुआ है और भारत सरकार को राज्यों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए अपनी नीति में बदलाव की आवश्यकता है.

सीएम अशोक गहलोत के बयान पर बीजेपी नेते राज्यवर्धन सिंह राठौर ने पलटवार करते हुए कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि गहलोत संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग और पेगासस कथित जासूसी मामले पर सवाल उठा रहे हैं. जबकि उनके (गहलोत) नेतृत्व में, वर्ष 2020 में, भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम 1885 की धारा 5 (2) और भारतीय टेलीग्राफ नियम, 1951 की धारा 419 (ए) को धता बताते हुए, सरकारी तंत्र का दुरुपयोग किया गया और फोन के निर्वाचित प्रतिनिधियों का दोहन किया गया.

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