CM गहलोत ने कृषि कानून को बताया 'काला कानून', कहा केंद्र सरकार कर रही है गुमराह

Smart News Team, Last updated: 11/10/2020 02:38 PM IST
  • राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार द्वारा कृषि कानूनों को काला कानून बताते हुए सरकार पर भी सवाल उठाया है. इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस के राज्यस्तरीय कृषि सम्मेलन में सभी को संबोधित करते हुए कहा कि वह किसानों के हित में उचित कदम उठाएगी.
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी केंद्र सरकार द्वारा पारित किये गए कृषि संबंधी कानूनों को 'काला कानून' बताया

जयपुर: कृषि कानून को लेकर कई राज्यों की सरकारें लगातार सवाल उठा रही हैं और विरोध भी जता रही हैं. इसी बीच राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी केंद्र सरकार द्वारा पारित किये गए कृषि संबंधी कानूनों को 'काला कानून' बताया है और कहा कि उनकी सरकार किसानों के हित में उचित कदम उठाएगी. राजस्थान सरकार ने इन कानूनों के खिलाफ उठाने जाने वाले कदम के भी संकेत दिए. गहलोत ने कांग्रेस के राज्यस्तरीय कृषि सम्मेलन में सभी को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की सलाह है कि राज्य सरकारों को इस पर विचार करना चाहिए.

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कृषि कानून पर बात करते हुए कहा, "हम चाहेंगे कि हम उनके सुझाव पर विचार करें. विधानसभा बुलाकर उस पर विचार करें, खुलकर बातचीत करें. राज्य सरकार बन चुके कानूनों के विधेयकों पर परीक्षण करवा रही है कि संविधान के तहत राज्यों को कानून बनाने के जो अधिकार दिए गए हैं उसके तहत क्या किया जा सकता है. इस बारे में जल्द ही फैसला कर लिया जाएगा. किसानों के हित में जो भी होगा उसमें कमी नहीं आने देंगे और जल्द ही सरकार के फैसले से आप अवगत होंगे." इसके साथ ही उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार हमेशा किसानों के साथ खड़ी मिलेगी. हमने किसानों के हित में हमेशा वही कदम उठाए हैं जिससे उन्हें बड़े पूंजीपतियों, बड़ी कंपनियों से उन्हें बचाया जा सके.

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गहलोत सरकार ने कोरोना वायरस के बीच इस विधेयक को लाने पर सवाल खड़ा किया. उन्होंने कहा, "क्या जरूरत पड़ गयी ये तीन काले कानून लाने की? ऐसी क्या आपात स्थिति थी कि ये कानून इस वक्त लाए गए." सरकार पर सवाल खड़ा करते हुए गहलोत ने कहा कि राज्यसभा में जिस तरह से इन कानूनों को पारित किया गया उससे सरकार की नीयत में खोट साफ दिखती है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार कोरोना वायरस संकट, आर्थिक संकट, चीन की चुनौती जैसी वास्तविक मुद्दों पर ध्यान देने के बजाय लोगों का ध्यान बंटाने, उन्हें भ्रमित करने के लिए ऐसे कदम उठा रही है.

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