सीएम गहलोत ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर कृषि कानूनों पर पुनर्विचार करने को कहा

Smart News Team, Last updated: 30/11/2020 06:58 PM IST
  • राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि केंद्र द्वारा तीनों कृषि बिलों को किसानों और विशेषज्ञों से चर्चा किए बिना ही लाया गया. संसद में विपक्षी पार्टियों द्वारा इन बिलों को सलेक्ट कमेटी को भेजने की मांग को भी सरकार ने नजरअंदाज किया. इन अधिनियमों में न्यूनतम समर्थन मूल्य तक का जिक्र नहीं है.
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत

जयपुर. किसान आंदोलन को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है. इसमें उन्होंने प्रधानमंत्री से कृषि कानूनों पर पुनर्विचार करने की मांग की है. गहलोत ने कहा कि केंद्र द्वारा लाए गए तीनों कृषि बिलों को किसानों और विशेषज्ञों से चर्चा किए बिना ही लाया गया. उन्होंने कहा कि संसद में विपक्षी पार्टियों द्वारा इन बिलों को सलेक्ट कमेटी को भेजने की मांग को भी सरकार ने नजरअंदाज किया. इन अधिनियमों में न्यूनतम समर्थन मूल्य का जिक्र नहीं है.

गहलोत ने लिखा कि इन कानूनों के लागू होने से किसान निजी हाथों पर निर्भर हो जाएगा. साथ ही निजी मंडियों के बनने से कृषि मंडियों का अस्तित्व भी खत्म हो जाएगा. इसके कारण किसानों को अपनी उपज का सही मूल्य नहीं मिलेगा. मुख्यमंत्री ने राजस्थान सरकार द्वारा तीनों नए कृषि कानूनों और सिविल प्रक्रिया संहिता में किए गए संशोधनों के बारे में भी लिखा है. मुख्यमंत्री ने लिखा है कि राज्य सरकार ने इन संशोधनों में किसानों के हित को सर्वोपरि रखा है और कृषि विपणन व्यवस्था को मजबूत बनाने का काम किया है. राजस्थान ने संविदा खेती (कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग) में भी न्यूनतम समर्थन मूल्य का प्रावधान किया है. किसी विवाद की स्थिति में पूर्ववत मंडी समितियों और सिविल न्यायालयों के पास सुनवाई का अधिकार होगा, जो किसानों के लिए सुविधाजनक है. 

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संविदा खेती की शर्तों का उल्लंघन या किसानों को प्रताड़ित करने पर व्यापारियों और कंपनियों पर 5 लाख रुपए तक का जुर्माना और सात साल तक की कैद का प्रावधान किया गया है. केंद्र के तीनों कृषि कानूनों के अतिरिक्त दीवानी प्रक्रिया संहिता, 1908 में संशोधन किया गया है, जिससे 5 एकड़ तक की भूमि वाले किसानों को कर्ज न चुका पाने पर कुर्की से मुक्त रखा गया है. गहलोत ने अपने पत्र में किसान आंदोलन का जिक्र करते हुए लिखा कि 26 नवंबर को देश जब संविधान दिवस मना रहा था तभी देश के अन्नदाता पर लाठियां और वॉटर कैनन चलाई जा रही थीं. गहलोत ने लिखा है कि वित्त वर्ष 2020-21 में जब जीडीपी विकास दर -7.5 फीसदी रही है तब भी कृषि क्षेत्र में 3.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है.

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