राजस्थान के स्कूल-कॉलेजों में कोरोना प्रोटोकॉल का हो सख्ती से पालन: CM अशोक गहलोत

Smart News Team, Last updated: Thu, 2nd Sep 2021, 7:28 PM IST
  • राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य के सभी शैक्षणिक संस्थानों में कोरोना संबंधी सभी गाइडलाइन्स का सख्ती से पालन करने पर जोर दिया. उन्होंने ट्वीट कर कहा कि एसओपी व कोरोना प्रोटोकॉल का पालन नहीं हुआ तो संक्रमण के फिर बढ़ने का खतरा है. 
राजस्थान के स्कूल-कॉलेजों में कोरोना प्रोटोकॉल का हो सख्ती से पालन: CM अशोक गहलोत (फाइल फोटो)

जयपुर. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश के सभी शैक्षणिक संस्थानों में कोरोना संबंधी सभी गाइडलाइन्स का सख्ती से पालन कराने पर जोर दिया है. गहलोत ने चेताया कि कोरोना प्रोटोकॉल का पालन अगर ढंग से नहीं हुआ तो राज्य में कोरोना संक्रमण का खतरा फिर से बढ़ सकता है. बता दें कि राजस्थान में कक्षा 9 से 12 तक के सरकारी और निजी स्कूलों को बुधवार से खोल दिया गया है. राज्य के शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों में पाठ्यक्रम में 30 प्रतिशत की कटौती भी की है. शिक्षा विभाग के द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार एक बार में 50 प्रतिशत छात्रों की संख्या की अनुमति है और सभी व्यवस्थाएं कोरोना प्रोटोकॉल के अनुसार की जाएगी.

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्वीट करते हुए लिखा कि राज्य में शैक्षणिक संस्थान खोल दिए गए हैं. कोरोना महामारी के कारण लंबे समय से शैक्षणिक संस्थान बंद होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई है. यह सभी की जिम्मेदारी है कि शिक्षण संस्थानों के संचालन के लिए जारी की गई एसओपी की सख्ती से पालन कराए. उन्होंने कहा, “यदि एसओपी व कोरोना प्रोटोकॉल का पालन नहीं हुआ तो पुन: संक्रमण बढ़ने का खतरा है इसलिए पढ़ाई के साथ स्वास्थ्य का भी उचित ध्यान रखें एवं सख्ती से प्रोटोकॉल व एसओपी की पालना सुनिश्चित करें. सभी विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को शुभकामनाएं.”

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कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के दौरान संक्रमितों की संख्या में तेजी से इजाफा होने के कारण अप्रैल में स्कूल बंद कर दिए गए थें. शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा के अनुसार ‘‘पिछले तीन महीनों में कोरोना संक्रमण की वजह से विद्यालयों में कक्षाएं शुरू नहीं हो सकीं जिसके चलते छात्रों की पढ़ाई बाधित हुई है इसी वजह से राज्य के सभी विद्यालयों में पाठयक्रम को 30 प्रतिशत कम करने का निर्णय किया गया है.’’ साथ ही उन्होंने कहा, ‘‘इसके साथ ही विभाग ने कोरोना की तीसरी लहर को लेकर तैयारियां की हैं और हमने अब हर महीने छात्रों का मूल्यांकन करने के लिये टेस्ट लेने का निर्णय लिया है. जिससे जब भविष्य में जब जरूरत पड़े तो छात्र की बुद्धि और क्षमता का मूल्यांकन का आधार निर्धारित हो सके।’’

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