प्रदेश में भूजल का हाल खराब, 29 जिले आए अतिदोहित श्रेणी में

Smart News Team, Last updated: Mon, 5th Apr 2021, 11:49 AM IST
  • पानी के अतिदोहन के चलते प्रदेश में जल संकट मंडराने लगा है, 29 जिलों में पाताल में भी पानी नहीं बचा है. केंद्रीय भूजल बोर्ड के इन-ग्रास सॉफ्टवेयर से 2020 में भूजल की यह स्थति सामने आई है.
प्रदेश में भूजल का हाल खराब, 29 जिले आए अतिदोहित श्रेणी में (प्रतीकात्मक तस्वीर)

जयपुर: प्रदेश में धीरे धीरे पानी के अतिदोहन के चलते जल संकट मंडराने लगा है. भूमिगत पानी के असंतुलित दोहन से प्रदेश के मात्र चार जिलों को छोड़कर बाकि के 29 जिलों में पाताल में भी पानी नहीं बचा है. केंद्रीय भूजल बोर्ड के इंडिया ग्राउंड वाटर रिसोर्स एसेसमेंट (इन-ग्रास सॉफ्टवेयर) से 2020 में भूजल की यह स्थति सामने आई है. पहले विभाग को भूजल की स्थति मैन्युल ही पता होती थी लेकिन अब इस सॉफ्टवेयर के जरिए सही स्थति पता चल जाती है. केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार 2017 में अतिदोहन वाले क्षेत्रों की संख्या 185 थी. जो 2020 में बढ़कर 205 हो गई है. अब जल्द ही इस रिपोर्ट को मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति के समक्ष रखा जाएगा. इसके बाद इस रिपोर्ट को केंद्रीय भूजल बोर्ड के पास भेजा जाएगा.

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ये जिले ही सुरक्षित

2020 की इन-ग्रास रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के मात्र बांसवाड़ा, हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर और डूंगरपुर जिले ही ऐसे है जहां भूजल की स्थति ठीक है. अधिकारियो की माने तो जल संरक्षण के उपाय होने से ये जिले सुरक्षित है. जबकि इस रिपोर्ट के अनुसार बाकि के 29 जिले अतिदोहित है, जहां पर भूजल का हाल खराब है.

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इस प्रकार समझे पानी की स्थति

2017 में अतिदोहित क्षेत्रों की संख्या 185 थी जो 2020 में बढ़कर 205 हो गई. जबकि सुरक्षित क्षेत्र 39 ही रह गए है जो 2017 में 45 थे. क्रिटिकल कल क्षेत्र 26 ही बचे है जो 2017 में 33 थे. वहीं सेमी क्रिटिकल क्षेत्र भी 29 से गिर कर 22 ही रह गए है.

 

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