राजस्थान उपचुनाव रिजल्ट में दिखा CM गहलोत का दम, पायलट खेमे का शोर बंद !

SHOAIB RANA, Last updated: Wed, 3rd Nov 2021, 4:13 PM IST
राजस्थान उपचुनाव में कांग्रेस के शानदार प्रदर्शन के बाद सीएम अशोक गहलोत ने साबित कर दिखाया है कि अनुभव में कितना दम होता है. खास बात है कि उनका यह संदेश सिर्फ विपक्षी भाजपा के लिए ही नहीं, अपनी ही पार्टी के सचिन पायलट खेमे के लिए भी है.
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ डिप्टी सीएम सचिन पायलट

जयपुर. राजस्थान की सत्ताधारी कांग्रेस में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच कलह के बीच आए उपचुनाव के नतीजों का कहीं न कहीं असर पायलट कैंप पर जरूर पड़ेगा. धरियावाद और वल्लभनगर विधानसभा की सीटें जीतकर अशोक गहलोत ने दिखा दिया है कि अभी उनके पास अनुभव का दम है. ऐसे में अब मंत्रिमंडल विस्तार जब किया जाएगा तो सीएम गहलोत को पायलट खेमे को संतुष्ट करने की चिंता ज्यादा नहीं सताएगी. सीधे शब्दों में कहें तो उपचुनाव में जीत दिलाने के बाद सीएम गहलोत पर पायलट कैंप की ओर से बन रहा दबाव कम हो जाएगा. ये कहना गलत नहीं होगा कि पिछले साल से कांग्रेस में चल रही वर्चस्व की लड़ाई में गहलोत अब पायलट से आगे निकल गए हैं.

सबसे खास बात है कि कार्यकाल के तीन साल पूरे करने जा रही अशोक गहलोत की सरकार ने उपचुनाव में धरियावद सीट पर बीजेपी को उसके ही गढ़ में एक तरह से मात दी है. इस सीट पर जीत के मायने कांग्रेस के लिए काफी सकरात्मक माने जा रहे हैं क्योंकि इससे साफ होता है कि गहलोत और पायलट खेमे में तकरार के बावजूद प्रदेश के लोगों में अभी पार्टी की छवि नहीं बिगड़ी है जिसका फायदा आने वाले विधानसभा चुनाव में भी जाहिर तौर पर देखने को मिलेगा. वहीं इतनी शानदार जीत हासिल करने के बाद अब पायलट खेमा भी कुछ समय के लिए शांत हो जाएगा और सीएम गहलोत की ओर उठने वाला शोर अब पहले जैसा नहीं होगा.

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अब मंत्रिमंडल विस्तार में सीएम गहलोत का दबदबा

हालांकि, अभी तक साफ नहीं है कि राजस्थान में मंत्रिमंडल विस्तार कब होगा. सचिन पायलट खेमा लगातार इसकी मांग कर रहा है लेकिन किसी न किसी वजह से सीएम गहलोत टालते हुए नजर आ रहे थे. अब उपचुनाव के बाद कहा जा रहा है कि नवंबर में मंत्रिमंडल विस्तार हो सकता है. खास बात है कि शानदार प्रदर्शन करने के बाद विस्तार के दौरान कहीं न कहीं उम्मीद है कि अब गहलोत का पलड़ा थोड़ा भारी रहेगा.

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सचिन पायलट और अशोक गहलोत का विवाद

कभी कांग्रेस ने खुलकर तो इस बारे में कुछ नहीं कहा लेकिन ये विवाद उसी समय से शुरू हो गया था जब राजस्थान में जीत हासिल करने के बाद मुख्यमंत्री युवा चेहरे सचिन पायलट को नहीं अनुभवी अशोक गहलोत को बनाया गया था. हालांकि, उस समय पायलट को डिप्टी सीएम बनाकर खुश रखने की कोशिश की गई थी. लेकिन कुछ ही समय में पायलट का मन सीएम की गद्दी पर आ गया और साल 2020 आते-आते बगावत पर उतर आए. इस दौरान ही उन्होंने डिप्टी सीएम पद और प्रदेश अध्यक्ष पद भी छोड़ दिया. बाद में राहुल और प्रियंका गांधी के कहने पर पायलट शांत हो गए थे. उसके बाद से ही पायलट खेमा लगातार मंत्रिमंडल विस्तार की मांग कर रहा है जो अभी तक नहीं हो पाया है.

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