जयपुर में कोरोना की तरह 'घूसखोरी' का संक्रमण भी बेकाबू

Smart News Team, Last updated: Thu, 13th May 2021, 10:50 AM IST
  • कोरोना महामारी के बावजूद घूसखोरों के हौंसले बुलंद हैं. पिछ्ले माह भी एसीबी ने कई कार्रवाई की. इस महीने एसीबी की रडार पर अस्पताल रह सकते हैं. कारण साफ है कि अस्पतालों में घूसखोरी के मामले सामने आ रहे हैं.
प्रतिकात्मक तस्वीर 

जयपुर. कोरोना की दूसरी लहर ने चारों ओर हाहाकार मचा रखा है और लॉकडाउन के चलते सभी गतिविधियां बंद है. लेकिन इसके बावजूद भी जयपुर में भ्रष्टाचार अपने चरम पर है. केवल अप्रैल महीने में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी एसीबी ने 28 अधिकारी और कर्मचारियों को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया. पिछले दो साल की बात की जाए तो अप्रैल महीने में होने वाली यह कार्रवाई सर्वाधिक है.

ब्यूरो के महानिदेशक बी एल सोनी ने बताया कि रिश्वतखोरी की शिकायतें लगातार आ रही है. कोर्ट से लेकर कॉलेज, पंचायत, थाना, डेयरी सहित अन्य संस्थाओं में भ्रष्टाचार के मामलों में अप्रैल में 28 अधिकारी-कर्मचारी गिरफ्तार किए गए हैं. अब कोरोना का कहर बढ़ा तो अस्पताल में भ्रष्टाचार से जुड़े मामले भी सामने आने लगे हैं. बता दें कि मई में सबसे बड़ी कार्यवाही आर यू एच एस अस्पताल में हुई है. जहां पर नर्सिंगकर्मी बेड दिलाने के नाम पर वसूली करते हुए पकड़ा गया. इस नर्सिंगकर्मी ने बेड दिलाने के नाम पर दो लाख रुपए मांगे, लेकिन सौदा एक लाख 30 हजार रुपए में तय हुआ. वहीं जयपुरिया अस्पताल में भी बेड दिलाने के नाम पर 13500 रूपये ऐंठने का मामला सामने आया था .

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अप्रैल महीने में जयपुर ग्रेटर नगर निगम का सहायक अग्निशमन अधिकारी छोटूराम व चालक फतेह सिंह को 90 हजार की रिश्वत लेते हुए ट्रैप किया गया. जबकि मई महीने में एसीबी ने बेड दिलाने वाले नर्सिंग कर्मी को रंगे हाथों गिरफ्तार किया.बता दें कि जिस तरह से अस्पतालों में इंजेक्शन के नाम पर कालाबाजारी हो रही है. बेड दिलाने के नाम पर पैसे लूटे जा रहे हैं. इन सभी मामलों के बाद अब एसीबी की नजर अब अस्पतालों पर है. एसीबी ने लोगों को चिन्हित कर उनपर नजरे रखनी भी शुरू कर दी हैं .

 

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